छत्तीसगढ़: शुरू होगी देश की पहली लिथियम खदान

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संजीव पॉल
संजीव पॉल

नक्सलवाद के साए से बाहर निकलकर छत्तीसगढ़ आज गैर-ईंधन खनिजों के उत्पादन में ओडिशा के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बन गया है। कोयला और लोहे के साथ-साथ अब यहां इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और सेमीकंडक्टर के लिए जरूरी ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ का भी विशाल भंडार मिला है।

टिन और लिथियम से घटेगी विदेशी निर्भरता

  • एकमात्र टिन उत्पादक: छत्तीसगढ़ (दंतेवाड़ा और सुकमा) भारत का इकलौता राज्य है जहां टिन अयस्क का व्यावसायिक उत्पादन हो रहा है। इससे चीन और मलेशिया जैसे देशों पर भारत की निर्भरता काफी हद तक कम होगी।

  • देश का पहला लिथियम ब्लॉक: कोरबा के कटघोरा में देश का पहला कमर्शियल लिथियम ब्लॉक जल्द शुरू होने जा रहा है, जो ईवी बैटरी और सोलर स्टोरेज इंडस्ट्री के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

किस जिले से निकल रहा कौन सा खनिज?

छत्तीसगढ़ में 200 से अधिक खदानें और माइनिंग ब्लॉक हैं, जहां धरती के नीचे 28 से ज्यादा प्रकार के खनिज मौजूद हैं:

  • कोयला: कोरबा (दीपका, गेवरा, कुसमुंडा), कोरिया, सूरजपुर, सरगुजा और रायगढ़ प्रदेश का मुख्य ‘कोल बेल्ट’ हैं, जो देशभर के थर्मल पावर प्लांट्स को रोशन करते हैं।

  • लौह अयस्क: दंतेवाड़ा (बैलाडीला) और बालोद (दल्ली-राजहरा) की खदानों से मिलने वाला उच्च गुणवत्ता का लोहा जापान तक निर्यात होता है।

  • सीमेंट और बॉक्साइट: बिलासपुर, रायपुर और बलौदाबाजार-भाटापारा का क्षेत्र ‘सीमेंट हब’ कहलाता है। सरगुजा का मैनपाट क्षेत्र बॉक्साइट (एल्युमिनियम का कच्चा माल) का बड़ा केंद्र है।

  • सोना और हीरा: गरियाबंद की किंबरलाइट चट्टानों में हीरे का विशाल भंडार है। महासमुंद के सोनखान और जशपुर की इब नदी में सोने का खनन होता है।

  • क्रिटिकल मिनरल्स: बलरामपुर में ग्रेफाइट और वैनेडियम, तथा महासमुंद में निकेल व क्रोमियम के ब्लॉक मौजूद हैं।

राजस्व में उछाल और जमीनी विकास

राज्य में हाल ही में नीलाम किए गए 65 खनिज ब्लॉकों से अगले 50 सालों में लगभग ₹4 लाख करोड़ का भारी-भरकम राजस्व मिलने का अनुमान है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही छत्तीसगढ़ ने ₹16,625 करोड़ का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त किया था। इस कमाई का फायदा सीधे स्थानीय लोगों को मिल रहा है। डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) नियमों के तहत खदानों से मिलने वाली रॉयल्टी का कम से कम 60 फीसदी हिस्सा प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और वनीकरण जैसी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जा रहा है।