Correct the Map’पर भारत का समर्थन, J&K पर दो टूक; अमेरिका विरोध में
National Flag of India

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पेश किए गए ‘करेक्ट द मैप’ (Correct the Map) प्रस्ताव पर भारत ने अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए इसके पक्ष में मतदान किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि इस प्रस्ताव का मकसद इक्वल एरिया मैप प्रोजेक्शन को संतुलित करना और वैश्विक क्षेत्रों, विशेषकर अफ्रीका को समान प्रतिनिधित्व देना है। भारत के इस कदम से पाकिस्तान में एक बार फिर खलबली मच गई है।
क्या है ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव का उद्देश्य?
इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ऐसे विश्व मानचित्रों के उपयोग को प्रोत्साहित करना है, जो देशों और महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल और आकार के अनुपात को सही ढंग से प्रदर्शित करते हैं।
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यह प्रस्ताव किसी विशेष वैश्विक मैप को आधिकारिक रूप से प्रमाणित या अनिवार्य नहीं बनाता है।
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इसका अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या स्थानों के नामों के राजनीतिक मानचित्रण से कोई लेना-देना नहीं है।
भारत का स्पष्ट रुख: कश्मीर और लद्दाख पर अडिग
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में वोटिंग के दौरान अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। भारत ने जोर देकर कहा कि यह प्रस्ताव किसी भी प्रकार की राष्ट्रीय सीमाओं या विशेष मानचित्र के चित्रण का समर्थन नहीं करता है।
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भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर रुख बेहद साफ है।
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देश के आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख समेत सभी संप्रभु क्षेत्रों को सटीक रूप से दर्शाया जाना चाहिए। किसी भी कीमत पर कोई भी गलत या भ्रामक नक्शा स्वीकार्य नहीं है।
164 देशों का समर्थन, अमेरिका ने किया विरोध
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला है। कुल 164 देशों ने इसके पक्ष में मतदान किया, जबकि 6 देश वोटिंग से दूर रहे। हालांकि, दुनिया की महाशक्ति अमेरिका ने इस प्रस्ताव का अकेला कड़ा विरोध किया है। भारत के इस रणनीतिक समर्थन ने वैश्विक मानचित्र प्रतिनिधित्व और संप्रभुता के मुद्दे पर एक बार फिर कूटनीतिक चर्चा छेड़ दी है।
