कैंब्रिज का खुलासा: बोको हराम ने ChatGPT और AI को बनाया नया हथियार

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

नाइजीरियाई आतंकी संगठन बोको हरम और उससे जुड़े गुट अब पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपना नया हथियार बना रहे हैं। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी द्वारा शुक्रवार को प्रकाशित एक चौंकाने वाली शोध रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, जिहादी लड़ाके हमलों की साजिश रचने, हथियारों के संचालन और सुरक्षा घेरा तोड़ने के लिए चैटजीपीटी (ChatGPT), क्लाउड (Claude), ग्रोक (Grok) और चीनी चैटबॉट डीपसीक (DeepSeek) जैसे अत्याधुनिक एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

पूर्व आतंकियों के बयानों से हुआ खुलासा

प्रौद्योगिकी और आतंकवाद विशेषज्ञ एंटोनिया जुएलिच द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में बोको हरम और इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस (ISWAP) के 20 से अधिक पूर्व लड़ाकों के अनुभवों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन के लड़ाके एआई को एक ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ (क्षमता बढ़ाने वाला साधन) मान रहे हैं। एक पूर्व जिहादी ने शोधकर्ता को बताया, “ऐसा कुछ भी नहीं है जिसका जवाब हमें इससे न मिला हो, हमारा मानना है कि यह सब कुछ जानता है।”

‘जेलब्रेकिंग’ और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की विदेशी ट्रेनिंग

रिपोर्ट में सामने आया है कि 2023 से ही आतंकी गुटों ने एआई का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। इराक, अफगानिस्तान और उत्तरी अफ्रीका से आए प्रशिक्षकों ने इन लड़ाकों को ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग’ और ‘जेलब्रेकिंग’ की तकनीक सिखाई। जेलब्रेकिंग के जरिए एआई कंपनियों द्वारा लगाए गए नैतिक सुरक्षा नियमों (Safety Guidelines) को बायपास किया जाता है, ताकि संवेदनशील और खतरनाक जानकारियां हासिल की जा सकें।

बोको हरम के विभिन्न गुटों ने अपने यहां समर्पित ‘एआई यूनिट्स’ बनाई हैं। इन यूनिट्स के पास अलग-अलग एआई टूल्स के पेड सब्सक्रिप्शन हैं। जब मैदानी लड़ाकों को किसी नए हथियार के इस्तेमाल, ड्रोन के जरिए विस्फोटकों की क्षमता बढ़ाने या किसी सैन्य ठिकाने पर हमले की रणनीति बनानी होती है, तो यह यूनिट एआई से तकनीकी समाधान निकालती है।

रणनीति में बदलाव: 200 की जगह 20 लड़ाकों से हमला

लीडेन यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के विशेषज्ञ ग्रेग क्लेन के अनुसार, एआई ने आतंकियों की रणनीतिक समझ और प्रभावशीलता को काफी बढ़ा दिया है। एक पूर्व ISWAP लड़ाके ने खुलासा किया:

  • पहले संगठन पारंपरिक तरीके से एक साथ 200 लड़ाके भेजता था, जिनमें से दर्जनों मारे जाते थे।

  • एआई की मदद से उन्होंने सीखा कि भारी भीड़ भेजने के बजाय छोटे-छोटे, सुनियोजित 20 लड़ाकों के दस्तों से सटीक हमला करना ज्यादा प्रभावी होता है।

  • नाइजीरियाई सेना ने जब मोटरसाइकिल सवार आतंकियों को रोकने के लिए चौकियों के चारों ओर गहरी खाइयां खोदीं, तो चैटबॉट से यह सीखा गया कि बाइक से उन खाइयों को कैसे पार किया जाए।

सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सिलिकॉन वैली और टेक कंपनियों द्वारा बनाए गए मौजूदा सुरक्षा घेरे नाकाफी साबित हो रहे हैं। ग्रेग क्लेन के मुताबिक, बार-बार अलग-अलग तरीकों से सवाल पूछकर एआई के सुरक्षा फिल्टर को आसानी से तोड़ा जा सकता है। विश्लेषकों ने आगाह किया है कि अगर आतंकी गुटों के हाथ रासायनिक या जैविक सामग्री लग गई, तो वे एआई की मदद से बड़े पैमाने पर विनाशकारी हथियार तैयार करने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) के सुरक्षा मानकों को तत्काल मजबूत करने की जरूरत है।