राम मंदिर ट्रस्ट में CEO की एंट्री, ब्राह्मण वोटों का भी सियासी गणित? जानिए

अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों पर चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषक सुरेंद्र दुबे का मानना है कि यह फैसला किसी नए वोट बैंक को जोड़ने से ज्यादा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अपने मौजूदा पारंपरिक ब्राह्मण वोट बैंक को 2027 के विधानसभा चुनाव तक मजबूती से साधे रखने और संभावित डैमेज कंट्रोल का प्रयास हो सकता है।
‘89% ब्राह्मण पहले से साथ, आधार सहेजना बड़ी चुनौती’
मैंने जब राजनीतिक विश्लेषक सुरेंद्र दुबे से यह सवाल पूछा गया कि क्या एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की इस अहम पद पर नियुक्ति से उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाता पूरी तरह भाजपा के पक्ष में लामबंद होंगे, तो उन्होंने स्पष्ट आंकड़ों का हवाला दिया।
सुरेंद्र दुबे के मुताबिक, “उत्तर प्रदेश में करीब 89 फीसदी ब्राह्मण वोट पहले ही भाजपा के साथ जा चुका है। इसलिए जितेंद्र मिश्रा की इस पद पर नियुक्ति से कोई नया वोट बैंक बनने से ज्यादा महत्वपूर्ण यह बात है कि भाजपा अपने इस मजबूत ब्राह्मण जनाधार को 2027 तक कितना एकजुट रख पाती है।” उन्होंने आगे कहा कि इसे एक तरह से डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि पिछले काफी समय से विपक्ष और अन्य हलकों से सरकार पर ब्राह्मण विरोधी होने के आरोप लगाए जाते रहे हैं।
पासी समाज की नाराजगी और कौशल किशोर पर बयान
राज्य में पासी समाज की कथित नाराजगी और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के रुख को लेकर पूछे गए सवाल पर सुरेंद्र दुबे ने बेबाक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कौशल किशोर इतने बड़े नेता नहीं हैं कि उन्हें समूचे पासी समाज का सर्वमान्य नेता मान लिया जाए।
दुबे ने रेखांकित किया कि कौशल किशोर पिछला चुनाव हार चुके हैं और आगामी चुनावों में उनके परिजनों के टिकट पर भी संकट मंडरा रहा है, जिसके चलते वे अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं।
पासी समाज को लेकर भाजपा में आंतरिक मंथन
दलित और पासी वोट बैंक को लेकर भाजपा के रुख पर बात करते हुए राजनीतिक विश्लेषक ने अंदरूनी गतिविधियों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी हाल ही में भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं से बातचीत हुई है।
नेताओं के हवाले से दुबे ने बताया कि पार्टी नेतृत्व पासी समाज के राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर गंभीरता से मंथन कर रहा है। आने वाले समय में पार्टी संगठन और सरकार के स्तर पर इस मंथन का असर जमीन पर भी साफ तौर पर देखने को मिलेगा।
