दिल्ली और महाराष्ट्र के 2.54 करोड़ मतदाता बाहर, क्या है सुधार का तरीका

Election-Commission
गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

चुनाव आयोग (ECI) द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तीसरे चरण की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी हो गई है, जिसमें अकेले दिल्ली और महाराष्ट्र से 2.54 करोड़ से अधिक नाम बाहर कर दिए गए हैं। इस बड़े बदलाव ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है, जिससे आगामी चुनावी समीकरणों पर गहरा असर पड़ सकता है।

दिल्ली और महाराष्ट्र के आंकड़ों का विश्लेषण

राज्य पूर्व पंजीकृत मतदाता ड्राफ्ट सूची में मतदाता बाहर हुए नाम (विलोपन) विलोपन का प्रतिशत
महाराष्ट्र 9.78 करोड़ 7.71 करोड़ 2.06 करोड़ 21.14%
दिल्ली 1.45 करोड़ 97.53 लाख 47.7 लाख 32.8%
कुल (दोनों राज्य) 11.23 करोड़ 8.68 करोड़ 2.54 करोड़ 22.6%

महाराष्ट्र में शहरी प्रवासन का बड़ा असर

महाराष्ट्र में कुल हटे हुए 2.06 करोड़ नामों में से 83.83 लाख (40.5%) नाम केवल तीन बड़े शहरी और महानगरीय जिलों—पुणे (28.66 लाख), ठाणे (28.59 लाख) और मुंबई उपनगर (26.58 लाख) से हैं। इसका मुख्य कारण मुंबई और पुणे जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में भारी संख्या में रहने वाली प्रवासी और किराएदार आबादी का पता बदलना, बायोमेट्रिक मैपिंग न होना या एन्यूमरेशन फ़ॉर्म जमा न करना रहा है।

दिल्ली में हर तीसरा मतदाता सूची से बाहर

राष्ट्रीय राजधानी में यह विलोपन सबसे अधिक दर्ज किया गया है।

  • 32.8% (47.7 लाख) मतदाता ड्राफ्ट रोल से बाहर रखे गए हैं।

  • रोहिणी विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 83.4% डिजिटाइजेशन पूरा हुआ, जबकि तुगलकाबाद में यह मात्र 52.1% पर सिमट गया।

  • नाम कटने के मुख्य कारणों में अनुपस्थिति (29.86%), मृत्यु (1.95%) और डुप्लीकेशन (0.98%) शामिल हैं, जबकि कई मामलों को “अन्य” श्रेणी में भी रखा गया है।

अंतिम सूची से पहले सुधार का मौका

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक ड्राफ्ट है। सभी प्रभावित राज्यों में मतदाताओं को 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का समय दिया गया है। 4 नवंबर 2026 को अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी।

  • फॉर्म 6 (Form 6): नए मतदाता पंजीकरण या छूटे हुए योग्य नागरिकों का नाम पुनः जोड़ने के लिए।

  • फॉर्म 7 (Form 7): फर्जी या दोहरी (Duplicate) प्रविष्टियों को हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए।

  • फॉर्म 8 (Form 8): नाम, पते, आयु या लिंग संबंधी प्रविष्टियों में सुधार कराने के लिए।