क्या NISAR सैटेलाइट हिमालयी आपदा का अलर्ट देने में चूक गया?

नई दिल्ली: दुनिया का सबसे महंगा और आम लोगों के इस्तेमाल वाला अर्थ-इमेजिंग सैटेलाइट NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) इन दिनों वैज्ञानिक और कूटनीतिक गलियारों में एक बड़े सवाल के घेरे में है। नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की घटना के बाद यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि आखिर हिमालय के सबसे संवेदनशील इलाके में घटी इस तबाही पर अंतरिक्ष में तैनात इस अत्याधुनिक सैटेलाइट की कोई सार्वजनिक रिपोर्ट या चेतावनी क्यों सामने नहीं आई।
क्या है NISAR मिशन और इसके वादे?
करीब 1.3 अरब डॉलर की लागत से बने इस संयुक्त मिशन को भारत और अमेरिका ने एक साल पहले लॉन्च किया था। एडवांस्ड डुअल-फ्रीक्वेंसी रडार से लैस इस सैटेलाइट को पृथ्वी की सतह पर मिलीमीटर तक के सटीक बदलावों को मापने, ग्लेशियरों की निगरानी करने, भूस्खलन और भूकंप का अध्ययन करने के लिए डिजाइन किया गया था। नासा और इसरो ने दावा किया था कि यह सैटेलाइट हर 12 दिन में दुनिया भर की जमीन और बर्फ की सतहों की तस्वीरें लेगा और इससे प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में बड़ी मदद मिलेगी।
नेपाल त्रासदी पर वैज्ञानिक चुप्पी क्यों?
नेपाल के रसुवा जिले में ग्लेशियर के टूटने और मलबे के खिसकने से जो भयानक तबाही मची, वह ठीक वैसा ही मौका था जिसके लिए NISAR को तैयार किया गया था। इसरो और नासा ने हाल ही में अंतरिक्ष में इस स्पेसक्राफ्ट के एक साल पूरे होने का जश्न भी मनाया था और इसके शानदार डेटा संग्रह की तारीफ की थी।
ऐसे में विशेषज्ञों द्वारा यह सवाल उठाया जा रहा है कि:
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क्या NISAR ने उस इलाके में सतह पर होने वाली शुरुआती हलचल को देखा?
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क्या इसने ग्लेशियर में किसी तरह की अस्थिरता या बदलाव के संकेत पकड़े थे?
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अगर डेटा मौजूद है, तो नेपाल की इस गंभीर आपदा पर कोई सार्वजनिक वैज्ञानिक विश्लेषण या चेतावनी क्यों जारी नहीं की गई?
नासा और इसरो का क्या है पक्ष?
इसरो ने जहां आपदा के बाद कहा है कि NISAR पृथ्वी की गतिविधियों को समझने के लिए लगातार डेटा इकट्ठा कर रहा है, वहीं नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट डॉ. पॉल रोसेन ने स्पष्ट किया है कि “NISAR सिर्फ डेटा इकट्ठा करता है, उसका विश्लेषण नहीं करता। विश्लेषण वैज्ञानिक करते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि यह अपनी तरह का पहला सैटेलाइट है और अभी हम इसकी टाइम सीरीज की शुरुआत कर रहे हैं, इसलिए इस तरह की घटनाओं की सटीक भविष्यवाणी करने की इसकी क्षमता को समझने में अभी कुछ समय लगेगा।
भविष्य के लिए एक इम्तिहान
वेनेजुएला में आए हालिया भूकंप के दौरान NISAR द्वारा डेटा और मैप जारी कर राहत कार्यों में मदद की गई थी, लेकिन नेपाल की त्रासदी के मामले में सार्वजनिक चर्चा से इस मिशन की आवाज का नदारद रहना हैरान करने वाला है। हिमालयी क्षेत्र में तेजी से बदलती जलवायु और आपदाओं के दौर में इस तरह के अत्याधुनिक मिशनों से वैज्ञानिक और आम जनता की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं, और नेपाल की यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि तकनीक और आपदा प्रबंधन के बीच के इस फासले को पाटना अभी बाकी है।
