नाइजर की राजधानी नियामी में बागी सैनिकों का तख्तापलट का प्रयास विफल

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शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

नियामी: नाइजर की राजधानी नियामी में रविवार को स्थिति शांत नजर आई और जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य हो गया है। इससे पहले, युवा सैनिकों द्वारा सत्ता पलटने के लिए किए गए एक विद्रोही प्रयास ने सत्तारूढ़ सैन्य जुंटा के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया था, जिसे वफादार सुरक्षा बलों और रूसी सैनिकों की मदद से सफलतापूर्वक कुचल दिया गया। साल 2023 के तख्तापलट के बाद से सत्ता पर काबिज जुंटा के लिए यह बगावत अब तक का सबसे बड़ा आंतरिक खतरा साबित हुई है।

शुक्रवार आधी रात से शुरू होकर शनिवार देर रात तक बागी सैनिकों और राष्ट्रपति के प्रति वफादार बलों के बीच भीषण गोलीबारी और संघर्ष चला। यह संघर्ष मुख्य रूप से नियामी के डियोरी हमानी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (जो सैन्य एयरबेस भी है) और राष्ट्रपति भवन के आसपास के इलाकों में केंद्रित रहा।

कैमरे पर दिखाए गए बागी सैनिक

हिंसा थमने के बाद दर्जनों बागी सैनिकों को गिरफ्तार कर लिया गया या मार गिराया गया। बाद में इनमें से कई सैनिकों को सरकारी टेलीविजन पर लाइव कैमरों के सामने परेड में पेश किया गया, हालांकि अधिकारियों ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि पकड़े गए बागियों पर आधिकारिक तौर पर क्या आरोप लगाए गए हैं और उनका आगे क्या हश्र होगा।

रविवार को शहर भर में, विशेषकर हवाई अड्डे और राष्ट्रपति भवन के बीच के मुख्य मार्गों पर भारी संख्या में सैन्य ट्रक और चौकियां तैनात नजर आईं। हालांकि, जुंटा प्रमुख अब्दौरामाने चियानी की तरफ से इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

विद्रोह से जुड़ी मुख्य बातें:

  • आधी रात के धमाके: शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात डियोरी हमानी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गोलियों की गड़गड़ाहट और धमाकों के साथ नाइजर के लोगों की नींद खुली। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यह हवाई अड्डा रूस के ‘अफ्रीका कॉर्प्स’ का भी मुख्यालय है और इस साल यहां अशांति की यह तीसरी बड़ी घटना थी।

  • विद्रोह के पीछे की वजह: विश्लेषकों और राजनयिकों का मानना है कि सेना के भीतर यह असंतोष देश में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और लगातार हो रहे जिहादी हमलों के कारण उपजा था। देश के दक्षिण और पश्चिम में जारी जिहादी हिंसा में बड़ी संख्या में सैनिकों के मारे जाने से सैन्य बलों के भीतर तनाव लगातार बढ़ रहा था।

  • रूसी बलों का निर्णायक हस्तक्षेप: बागी सैनिक हवाई अड्डे के बेस पर कई घंटों तक डटे रहे और वफादार बलों का कड़ा मुकाबला किया। जब बागी राष्ट्रपति गार्ड्स पर भारी पड़ने लगे, तब रूस के अफ्रीका कॉर्प्स ने जमीनी और हवाई सहायता मुहैया कराई, जिसके बाद विद्रोहियों को बेअसर किया जा सका।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय समर्थन

रूस के राजदूत विक्टर वोरोपाएव ने रूसी मीडिया को जानकारी दी कि नाइजर सरकार ने औपचारिक रूप से रूसी बलों से मदद मांगी थी और अफ्रीका कॉर्प्स के हस्तक्षेप के कारण ही बागियों को “तटस्थ” किया जा सका।

इस संकट के बीच बुर्किना फासो और माली वाले क्षेत्रीय गठबंधन (AES) ने खुलकर नाइजर की सैन्य सरकार का समर्थन किया और बागी सैनिकों के इस कदम को “विश्वासघात” करार दिया। इसके अलावा अल्जीरिया और तुर्की ने भी नाइजर की आंतरिक सुरक्षा और स्थिरता के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की है।