नेपाल बाढ़: भारत, चीन, अमेरिका समेत पूरी दुनिया ने बढ़ाया मदद का हाथ

काठमांडू: नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और कई नागरिक अभी भी लापता हैं। बाढ़ का वेग इतना भयानक था कि सड़कें, पुल और बड़ी-बड़ी इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। संकट की इस चुनौतीपूर्ण घड़ी में नेपाल को उबारने के लिए भारत, अमेरिका और चीन समेत कई देशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है।
आपदा प्रबंधन के लिए 20 अरब रुपये का फंड मौजूद
नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाकों में तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। वित्त मंत्रालय के सह-सचिव घनश्याम उपाध्याय ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के बजट में सरकार के पास आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों के लिए 20 अरब नेपाली रुपये का कोष (Disaster Management Fund) पहले से उपलब्ध है। इस फंड का इस्तेमाल बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत सामग्री (भोजन, टेंट, दवाएं) खरीदने, हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू करने और मलबा हटाने के काम में किया जा रहा है।
भारत ने भेजी 47.5 टन राहत सामग्री और NDRF की टीमें
पड़ोसी देश होने के नाते भारत ने इस त्रासदी में सबसे पहले मदद पहुंचाई है। भारत ने अब तक 47.5 टन से अधिक मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) सामग्री नेपाल भेजी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में टूटे हुए संपर्क मार्गों को फिर से चालू करने के लिए भारत ने बेली ब्रिज (Bailey bridges) और प्रीफैब ट्रस ब्रिज देने की भी पेशकश की है। इसके अलावा, अत्याधुनिक उपकरणों से लैस राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की कई टीमें नेपाल में रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए तैनात की गई हैं।
चीन, अमेरिका और ब्रिटेन ने खोला खजाना
चीन ने राहत और बचाव कार्य के लिए नकद सहायता की पेशकश की है। इसके साथ ही टनल रेस्क्यू के लिए चीनी विशेषज्ञों की एक टीम भी नेपाल भेजी गई है। नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में बाढ़ से दोनों तरफ नुकसान हुआ है, जिसके चलते चीन सीधे तौर पर राहत व तकनीकी सहयोग मुहैया करा रहा है।
वहीं, अमेरिका और ब्रिटेन ने तत्काल वित्तीय सहायता का ऐलान किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और ब्रिटिश विदेश मंत्री ने आपदा मोर्चे पर मानवीय सहायता पहुंचाने और लापता नागरिकों की खोज में हरसंभव सहयोग देने की इच्छा जताई है।
मृतकों की पहचान के लिए ऑस्ट्रेलिया-दक्षिण कोरिया से मदद
आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की शिनाख्त एक बड़ी चुनौती बन गई है। इसे देखते हुए नेपाल सरकार ने ऑस्ट्रेलिया और साउथ कोरिया से डीएनए (DNA) टेस्टिंग और फोरेंसिक जांच विशेषज्ञों की मांग की है। इसके अतिरिक्त जापान, श्रीलंका और बांग्लादेश की सरकारों ने भी नेपाल सरकार से संपर्क कर राहत सामग्री और अन्य जरूरी सामान भेजने की प्रतिबद्धता जताई है।
विश्व बैंक और ADB ने दिया आर्थिक पैकेज का प्रस्ताव
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं भी नेपाल के पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभा रही हैं। विश्व बैंक ने इस त्रासदी से निपटने के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। वहीं, एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने नेपाल के लिए दीर्घकालिक (Long-term) वित्तीय मदद का प्रस्ताव रखा है। इस फंड का उद्देश्य भविष्य में किसी भी आपदा से निपटने की तैयारी करना, इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाना और देश के अर्ली-वार्निंग सिस्टम को बेहतर करना है।
