किसने कही- ‘राहुल गांधी को PM उम्मीदवार नहीं माना तो छोड़ देंगे कैबिनेट’

चेन्नई: तमिलनाडु में सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) और कांग्रेस के गठबंधन में 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर सियासी रार खुलकर सामने आ गई है। राज्य के पर्यटन मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता एस. राजेश कुमार ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर टीवीके 2029 के आम चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल गांधी का समर्थन नहीं करती है, तो कांग्रेस के मंत्री राज्य कैबिनेट से तुरंत इस्तीफा दे देंगे।
कन्याकुमारी वेस्ट जिला कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष जॉर्ज रॉबिन्सन के पदभार ग्रहण समारोह में बोलते हुए राजेश कुमार ने टीवीके नेतृत्व से प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी केवल और केवल राहुल गांधी के नाम का ही समर्थन करेगी।
‘विजय फॉर पीएम’ की मांग से गरमाई सियासत
यह विवाद तब गहराया जब सी. जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके के मंत्रियों, विधायकों और कार्यकर्ताओं की तरफ से विजय को आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग उठाई जाने लगी। राज्य भर में कई सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे पोस्टर्स भी लगाए गए हैं जिनमें विजय को पीएम पद के दावेदार के रूप में पेश किया गया है।
हालिया इंडिया टुडे-सी वोटर सर्वे में भी प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरों में विजय को 9 फीसदी समर्थन के साथ तीसरा स्थान मिला था। इसके बाद से ही टीवीके कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर है, जिसे लेकर अब कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है।
कैबिनेट से इस्तीफे की पेशकश
पर्यटन मंत्री राजेश कुमार ने साफ किया कि इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि गठबंधन सहयोगी टीवीके इस मामले में कांग्रेस का साथ नहीं देती है, तो वह और उनके सहयोगी उच्च शिक्षा मंत्री पी. विश्वनाथन अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। कांग्रेस नेता के इस कड़े रुख से दोनों दलों के बीच रिश्तों में गहरी दरार आने की आशंका जताई जा रही है।
मई में कांग्रेस के समर्थन से बनी थी विजय सरकार
मई में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस के समर्थन से ही सी. जोसेफ विजय ने तमिलनाडु में सरकार बनाई थी और कांग्रेस भी कैबिनेट में शामिल हुई थी। चुनाव से पहले कांग्रेस ने एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन विजय की चुनावी लहर में डीएमके को करारी हार का सामना करना पड़ा। नतीजों के बाद कांग्रेस ने पाला बदलते हुए विजय को समर्थन देने का ऐलान किया, जिस पर डीएमके ने तीखी नाराजगी जताते हुए कांग्रेस पर धोखेबाजी का आरोप लगाया था। अब सरकार बनने के कुछ ही महीनों के भीतर दोनों सहयोगियों के बीच लोकसभा चुनाव के नेतृत्व को लेकर तकरार तेज हो गई है।
