चित्रकूट में महाबाढ़, टूटा 23 साल का रिकॉर्ड; हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

चित्रकूट : उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित धार्मिक नगरी चित्रकूट में पिछले 18 घंटे से हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। विंध्य क्षेत्र से आए पानी और दो बांधों के टूटने के कारण मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से 30 फीट ऊपर बह रही है। हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि साल 2003 में आई ऐतिहासिक बाढ़ का रिकॉर्ड भी टूट गया है। शहर में घुसे बाढ़ के पानी से यूपी-एमपी का सीधा संपर्क टूट गया है। फंसे लोगों को निकालने के लिए सेना के हेलिकॉप्टर और नावों का सहारा लिया जा रहा है और अब तक 650 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है।

अचानक क्यों बिगड़े हालात? दो बांधों का टूटना मुख्य वजह

प्रशासन के मुताबिक, अचानक आई इस भयानक बाढ़ के पीछे भारी बारिश के साथ-साथ बांधों का टूटना बड़ी वजह है। विंध्य क्षेत्र के पहाड़ी कैचमेंट एरिया में लगातार बारिश होने से पानी तेजी से चित्रकूट की तरफ उतरा। इसी बीच मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित ‘गोरगी बांध’ फूट गया। इसके साथ ही मानिकपुर तहसील क्षेत्र में ‘डोडा बांध’ का भी एक बड़ा हिस्सा ढह गया। दोनों बांधों से निकले लाखों गैलन पानी के सैलाब ने सीधे रिहायशी बस्तियों का रुख किया, जिससे शहर में बहुत तेजी से जलभराव हुआ और लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

रामघाट डूबा, प्रमुख आश्रम पानी से घिरे

बाढ़ की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चित्रकूट के प्रमुख धार्मिक स्थल चारों तरफ से पानी से घिर गए हैं। जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य का तुलसीपीठ (कांच मंदिर), दीनदयाल शोध संस्थान परिसर, आरोग्यधाम, सियाराम कुटीर और जानकीकुंड आश्रम में पानी भर गया है। प्रसिद्ध रामघाट पूरी तरह से डूब चुका है।

सीतापुर, तरौंहा, बहादुरपुर और गोबरिया जैसी निचली बस्तियों के हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहां घरों के भीतर 5 से 7 फीट तक पानी भर गया है, जिसके चलते लोग अपनी छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं। शहर के रेलवे ट्रैक पर भी पानी भर गया है।

सेना का एयरलिफ्ट और रातभर चला SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन

बाढ़ की भयावहता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल मोर्चा संभाल लिया है। जलमग्न इलाकों से लोगों को निकालने के लिए सड़कों पर नावें चलाई जा रही हैं। जिन इलाकों में हालात ज्यादा गंभीर हैं, वहां सेना के हेलिकॉप्टर से लोगों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है। डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट होमगार्ड के अनुसार, एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने रात के समय भी अपना रेस्क्यू अभियान जारी रखा ताकि बाढ़ में फंसे हर नागरिक को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

मौसम विभाग का अलर्ट, 150 मिलीमीटर बारिश दर्ज

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 18 घंटों में चित्रकूट में 150 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह पिछले 23 सालों में हुई सबसे ज्यादा बारिश है, जिसने 2003 की जलप्रलय को भी पीछे छोड़ दिया है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए भी इलाके में झमाझम बारिश होने की स्थिति जताई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और लोगों से अपील की है कि वे अगले कुछ घंटों तक बेहद सावधानी बरतें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।