3000 KM का NOTAM जारी: हिंद महासागर में मिसाइल टेस्ट की तैयारी

नई दिल्ली: भारत एक बार फिर से लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइल के परीक्षण की बड़ी तैयारी कर रहा है। रक्षा अनुसंधान और विकास से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हिंद महासागर क्षेत्र में 2,995 किलोमीटर लंबे समुद्री और हवाई गलियारे के लिए NOTAM (Notice to Air Missions) जारी किया गया है। भारत की ओर से सामरिक क्षेत्र में लगातार उठाए जा रहे कदमों और मिसाइल परीक्षणों की इस सुगबुगाहट से पड़ोसी मुल्कों, विशेषकर चीन और पाकिस्तान की नींद उड़ना स्वाभाविक है।
2 और 3 सितंबर को आसमान और समंदर में पाबंदी
ताजा NOTAM के अनुसार, 2 और 3 सितंबर 2026 को हिंद महासागर के इस विशिष्ट क्षेत्र में हवाई और समुद्री ट्रैफिक पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा, ताकि संभावित मलबे से नागरिक विमानों को सुरक्षित रखा जा सके। रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर मिसाइल का नाम नहीं बताया है, लेकिन लॉन्चिंग ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से होने की प्रबल संभावना है। यह द्वीप भारत के रणनीतिक मिसाइल परीक्षणों का प्रमुख केंद्र है।
अग्नि-3 या अग्नि-4 के परीक्षण की ज्यादा उम्मीद
सामरिक जानकारों के मुताबिक, 2,995 किलोमीटर का यह दायरा अग्नि-3 (रेंज 3,000 से 5,000 किमी) या अग्नि-4 (रेंज 4,000 किमी) जैसी मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण से ज्यादा मेल खाता है। गौरतलब है कि अगस्त में करीब 2,530 किलोमीटर लंबे NOTAM के बीच अग्नि-4 का सफल परीक्षण किया गया था, जिससे साफ होता है कि NOTAM की लंबाई हमेशा मिसाइल की अधिकतम रेंज को नहीं दर्शाती। चूँकि अग्नि-3 पहले से ही सेना का हिस्सा है, इसलिए यह परीक्षण मिसाइल की विश्वसनीयता, नए गाइडेंस सिस्टम या री-एंट्री तकनीक की पुष्टि के लिए हो सकता है।
अग्नि-6 को लेकर क्यों गरमा रहा है बाजार?
नए NOTAM के ऐलान के साथ ही भारत की बहुचर्चित अग्नि-6 (Agni-6) को लेकर अटकलें फिर तेज हो गई हैं। भारत लंबे समय से इस अत्याधुनिक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) पर काम कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के दावों के अनुसार:
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अग्नि-6 की मारक क्षमता 8,000 से 10,000 किलोमीटर या उससे अधिक होने का अनुमान है।
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यह चार चरणों वाली सॉलिड फ्यूल आधारित मिसाइल होगी।
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इसमें MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) तकनीक का इस्तेमाल होगा, जिससे एक ही मिसाइल 10 से 12 अलग-अलग लक्ष्यों को एक साथ तबाह कर सकेगी।
मई 2026 में हुए MIRV परीक्षण और 2024 के ‘मिशन दिव्यास्त्र’ ने भारत की इस उन्नत तकनीक में बढ़ती क्षमता को दुनिया के सामने साबित कर दिया है। यह मिसाइल तकनीक भारत की परमाणु रणनीति में ‘विश्वसनीय जवाबी कार्रवाई’ (Second Strike Capability) को अभेद्य बना देगी।
