2035 तक भारत का अपना स्पेस स्टेशन, 400 KM की ऊंचाई पर ठिकाना

अंतरिक्ष में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में भारत ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। भारत 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन पृथ्वी की कक्षा में करीब 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना के पहले मॉड्यूल को मंजूरी मिल चुकी है।
इसकी जानकारी इसरो चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने दी है। भारतीय स्पेस स्टेशन बनने के बाद भारत उन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनके पास अपनी कक्षीय अंतरिक्ष प्रयोगशाला होगी।
2030 की डेडलाइन बढ़ाकर 2035 की गई
भारत ने पहले अपना स्पेस स्टेशन 2030 तक स्थापित करने का लक्ष्य रखा था। अब इसकी समयसीमा बढ़ाकर 2035 कर दी गई है।
प्रस्तावित स्टेशन का नाम भारतीय स्पेस स्टेशन रखा जाएगा। इसे पृथ्वी की निचली कक्षा में करीब 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित करने की योजना है।
परियोजना को कई चरणों में पूरा किया जाएगा। इसके लिए पहले मॉड्यूल को सितंबर 2024 में मंजूरी दी जा चुकी है। इस मॉड्यूल के लिए केंद्र सरकार ने 1,763 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।
52 टन वजन और 27 मीटर लंबाई
भारतीय स्पेस स्टेशन का प्रस्तावित ढांचा काफी बड़ा होगा। इसका वजन करीब 52 टन बताया गया है। इसकी लंबाई 27 मीटर और चौड़ाई 20 मीटर होगी।
स्टेशन को कुल 5 मॉड्यूल में तैयार करने की योजना है। इसे सामान्य तौर पर 3 से 4 अंतरिक्ष यात्रियों के लिए डिजाइन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर इसमें 5 से 6 अंतरिक्ष यात्री भी रह सकेंगे।
अंतरिक्ष यात्रियों के लंबे प्रवास को ध्यान में रखते हुए स्टेशन को इस तरह तैयार करने की योजना है कि वहां अंतरिक्ष यात्री 3 से 6 महीने तक रह सकें।
अंतरिक्ष में भारत का अपना ठिकाना
भारतीय स्पेस स्टेशन का मकसद सिर्फ कक्षा में स्थायी मौजूदगी बनाना नहीं है। यहां माइक्रोग्रैविटी में वैज्ञानिक प्रयोग, मानव अंतरिक्ष मिशन और लंबी अवधि के शोध को आगे बढ़ाने की योजना है।
यह परियोजना भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के अगले चरण से भी जुड़ी है, क्योंकि लंबे समय तक अंतरिक्ष यात्रियों को कक्षा में रखने के लिए जरूरी तकनीक और संचालन क्षमता विकसित करनी होगी।
अभी अंतरिक्ष में कौन-कौन से स्पेस स्टेशन हैं?
अंतरिक्ष में International Space Station (ISS) है। यह किसी एक देश का स्टेशन नहीं है, बल्कि कई देशों की साझेदारी से तैयार किया गया अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट है। इसके अलावा चीन का Tiangong Space Station भी पृथ्वी की कक्षा में संचालित है।
चीन ने अपने तियांगोंग स्पेस स्टेशन का निर्माण 2021 में शुरू किया था। भारत यदि 2035 तक अपना प्रस्तावित स्टेशन स्थापित कर लेता है, तो वह अपनी स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष प्रयोगशाला संचालित करने वाले देशों की सूची में शामिल हो जाएगा।
