महिलाओं को लेकर क्या सोचते हैं केरल के सऊदी रिटर्न प्रवासी?

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

तिरुवनंतपुरम: कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सऊदी अरब से केरल लौटे मुस्लिम प्रवासियों की महिलाओं को लेकर सोच पर World Bank की एक रिसर्च का हवाला देते हुए चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि स्टडी के निष्कर्ष परेशान करने वाले हैं और केरल के मुस्लिम समाज के भीतर इस पर गंभीर आत्ममंथन और बातचीत की जरूरत है।

थरूर ने यह प्रतिक्रिया कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के सीनियर फेलो मिलान वैष्णव की उस पोस्ट के बाद दी, जिसमें World Bank का पॉलिसी रिसर्च वर्किंग पेपर साझा किया गया था। रिसर्च में सऊदी अरब से लौटे केरल के प्रवासियों और दूसरे खाड़ी देशों से लौटे प्रवासियों की महिलाओं से जुड़े सामाजिक नजरिए की तुलना की गई है।

महिलाओं को लेकर सोच पर क्या सामने आया?

रिसर्च में सऊदी अरब से लौटे प्रवासियों के बीच महिलाओं और परिवार में पुरुष की भूमिका को लेकर कई सवाल पूछे गए थे। इसमें 43 प्रतिशत लोगों ने माना कि अगर पत्नी पति की बात नहीं मानती है तो पति को उसे पीटने का अधिकार है। दूसरे खाड़ी देशों से लौटे मुस्लिम प्रवासियों में यह आंकड़ा 37 प्रतिशत था।

महिलाओं के घर से बाहर निकलने को लेकर भी दोनों समूहों के जवाबों में अंतर दर्ज किया गया। सऊदी अरब से लौटे 75.3 प्रतिशत लोगों का मानना था कि अगर पत्नी या बेटी घर से बाहर बेरोकटोक घूमती है तो समाज में पुरुष की इज्जत कम होती है। दूसरे खाड़ी देशों से लौटे प्रवासियों में यह राय रखने वालों की संख्या 67.7 प्रतिशत थी।

पुरुष के परिवार पर नियंत्रण से जुड़े सवालों में भी अंतर सामने आया। 85 प्रतिशत सऊदी रिटर्न प्रवासियों ने माना कि जो पुरुष अपनी पत्नी पर काबू नहीं रख पाता, उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा कम होती है। वहीं 64.8 प्रतिशत लोगों का मानना था कि परिवार में आखिरी फैसला पुरुष का होना चाहिए।

हिंसा और महिलाओं के कपड़ों पर भी सवाल

स्टडी में महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ और हिंसा को लेकर भी सवाल पूछे गए। सऊदी अरब से लौटे 53 प्रतिशत लोगों ने माना कि अगर अंधेरा होने के बाद कोई महिला या लड़की अकेले बाहर जाती है और उसके साथ छेड़छाड़ होती है, तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार है।

वहीं 70 प्रतिशत लोगों ने माना कि महिलाओं के अश्लील कपड़े पुरुषों को गलत व्यवहार करने के लिए उकसाते हैं।

ये आंकड़े सऊदी अरब से लौटे प्रवासियों और दूसरे खाड़ी देशों से लौटे प्रवासियों के जवाबों की तुलना पर आधारित हैं। दूसरे समूह में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात से लौटे प्रवासियों को शामिल किया गया था।

थरूर बोले, केरल की परंपरा से अलग है यह तस्वीर

मिलान वैष्णव की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि ये निष्कर्ष परेशान करने वाले हैं। उनके अनुसार, केरल में इस्लाम की एक उदार और प्रगतिशील परंपरा रही है, जो राज्य में मौजूद आपसी मेलजोल और सांप्रदायिक सद्भाव के अनुरूप है।

उन्होंने कहा कि केरल को इस बात पर गर्व है कि मुस्लिम लड़कियों को भी लड़कों के बराबर शिक्षा दी गई है। थरूर के मुताबिक, रिसर्च यह संकेत देती है कि विदेशों से रूढ़िवादी और प्रतिक्रियावादी सोच के साथ कुछ रीति-रिवाज भी लौट रहे हैं, जो केरल की लंबे समय से चली आ रही परंपराओं के उलट हैं।

उन्होंने मुस्लिम समुदाय के भीतर इस मुद्दे पर गंभीर आत्ममंथन और आपसी बातचीत की जरूरत बताई।

2022 में प्रकाशित हुआ था World Bank का पेपर

यह रिसर्च पेपर मार्च 2022 में प्रकाशित हुआ था। इसे जॉर्ज जोसेफ, कियाओ वांग, ज्ञानराज चेलाराज, एमसेट ओ ता, लुइस एंड्रेस, सैयद उस्मान जावेद और इरुदया राजन ने लिखा था।

रिसर्च का मुख्य सवाल यह था कि क्या अंतरराष्ट्रीय प्रवासन केवल पैसे भेजने तक सीमित रहता है या प्रवासी जिस देश में रहते हैं, वहां के सामाजिक नियमों और मूल्यों का भी उनके व्यवहार पर असर पड़ता है।

अध्ययन में Centre for Development Studies के Kerala Migration Survey 2013 के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। सर्वे में केरल के सभी 14 जिलों और 63 तालुकों के 14,575 परिवारों को शामिल किया गया था। कुल 63,230 लोगों से जानकारी ली गई थी।

रिसर्च के लिए सऊदी अरब से केरल लौटे 256 प्रवासियों और दूसरे खाड़ी देशों से लौटे 322 प्रवासियों के जवाबों की तुलना की गई।

सऊदी और दूसरे Gulf देशों को अलग-अलग क्यों रखा गया?

अध्ययन में सऊदी अरब से लौटे प्रवासियों को दूसरे खाड़ी देशों से लौटे प्रवासियों से अलग समूह में रखा गया। दूसरे समूह में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर और UAE शामिल थे।

रिसर्च में महिलाओं से जुड़े सामाजिक और पारिवारिक नजरिए को लेकर दोनों समूहों के जवाबों की तुलना की गई। इसके आधार पर सऊदी अरब से लौटे केरल के पुरुष प्रवासियों में महिलाओं को लेकर अपेक्षाकृत अधिक रूढ़िवादी नजरिए की बात सामने आई।