मक्का समझौते में ईरान की एंट्री! बदलेगा पश्चिम एशिया का सुरक्षा समीकरण?

तेहरान : पश्चिम एशिया में सुरक्षा सहयोग को लेकर बनी नई तस्वीर के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौता फिर चर्चा में है। 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। अब ईरान को भी इसमें शामिल होने का प्रस्ताव दिए जाने की खबर सामने आई है। तेहरान इस प्रस्ताव का आकलन कर रहा है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान इसे औपचारिक रूप से स्वीकार करेगा या नहीं।
बांग्लादेश ने भी इस सुरक्षा सहयोग तंत्र में शामिल होने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। हालांकि, ढाका की ओर से भी अभी कोई औपचारिक फैसला नहीं हुआ है।
क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता?
7 अगस्त को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हुए समझौते में सामूहिक सुरक्षा को लेकर एक अहम प्रावधान रखा गया है। इसके तहत किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा।
इस व्यवस्था को तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग मजबूत करने की दिशा में कदम के तौर पर पेश किया गया है। हालांकि, समझौते में सैन्य प्रतिबद्धताओं और इसके व्यावहारिक संचालन से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
तुर्किए के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने इस प्रावधान की तुलना NATO के Article 5 से की है। उन्होंने साथ ही कहा कि यह सुरक्षा साझेदारी किसी खास देश को निशाना बनाकर तैयार नहीं की गई है।
ईरान को मिला शामिल होने का प्रस्ताव
ईरान की संसद से जुड़ी समाचार एजेंसी ‘खानेह मेल्लत’ के प्रमुख मेहदी रहीमी ने अल मयादीन को बताया कि तेहरान को मक्का समझौते में शामिल होने का प्रस्ताव मिला है।
उन्होंने कहा कि ईरानी पक्ष इस प्रस्ताव का आकलन कर रहा है। उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया के देश अपनी सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
बांग्लादेश भी विकल्प पर कर रहा विचार
मक्का समझौते का दायरा बढ़ाने की चर्चा केवल ईरान तक सीमित नहीं है। बांग्लादेश ने भी सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच बने सैन्य सहयोग तंत्र में शामिल होने की संभावना को खारिज नहीं किया है।
सरकार के दो मंत्रियों की ओर से संकेत दिया गया है कि ढाका इस प्रस्ताव पर विचार कर सकता है। हालांकि, किसी भी निर्णय में बांग्लादेश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही गई है।
सऊदी अरब के साथ बांग्लादेश के पहले से संबंध हैं और तुर्किए के साथ रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा है। ऐसे में ढाका के लिए यह मंच सुरक्षा और व्यापक सहयोग के लिहाज से एक संभावित विकल्प हो सकता है।
ईरान के शामिल होने से क्या बदलेगा?
ईरान के शामिल होने की स्थिति में इस सुरक्षा ढांचे का दायरा पश्चिम एशिया तक और बढ़ जाएगा। हालांकि, इसका असर समझौते की सैन्य शर्तों और सदस्य देशों की वास्तविक प्रतिबद्धताओं पर निर्भर करेगा।
