घर में फंसे BJP विधायक, अतिक्रमण और पुलों की डिजाइन पर उठाए सवाल

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संजीव पॉल
संजीव पॉल

रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा में आई बाढ़ ने गुढ़ विधानसभा क्षेत्र से BJP विधायक नागेंद्र सिंह के घर को भी अपनी चपेट में ले लिया। बीहर नदी के किनारे स्थित उनके आवास का ग्राउंड फ्लोर पानी में डूब गया और विधायक को परिवार के साथ करीब 18 घंटे दूसरी मंजिल पर रहना पड़ा। पानी उतरने के बाद बाहर आए नागेंद्र सिंह ने रीवा में बाढ़ की स्थिति के लिए नदी-नालों पर बढ़ते अतिक्रमण और नए पुलों की डिजाइन पर सवाल उठाए।

18 घंटे दूसरी मंजिल पर रहे विधायक

लगातार बारिश के बाद बीहर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। नदी के आसपास के इलाकों में पानी भरने लगा और विधायक नागेंद्र सिंह का आवास भी इसकी चपेट में आ गया।

हालात बिगड़ने पर घर का ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह पानी में डूब गया। इसके बाद विधायक और उनके परिवार को दूसरी मंजिल पर रहना पड़ा। करीब 18 घंटे बाद बारिश थमी और नदी का जलस्तर कम होने लगा, तब घर से बाहर निकलने का रास्ता साफ हुआ।

बाढ़ का पानी उतरने के बाद घर में सफाई का काम शुरू कराया गया। अंदर कीचड़ और गंदगी जमा हो गई थी। फर्नीचर और घरेलू सामान भी पानी से प्रभावित हुआ।

नदी-नालों पर अतिक्रमण को बताया बड़ी वजह

घर से बाहर निकलने के बाद विधायक ने रीवा में बाढ़ की वजहों पर बात की। उनका कहना है कि नदी-नालों और जल निकासी के रास्तों पर लगातार अतिक्रमण बढ़ा है।

नागेंद्र सिंह के मुताबिक, शहर की आबादी तो बढ़ती गई, लेकिन उसके अनुपात में drainage system विकसित नहीं हुआ। बारिश के दौरान पानी को निकलने के लिए पर्याप्त रास्ता नहीं मिल पाता और हालात तेजी से बिगड़ जाते हैं।

उन्होंने कहा कि रीवा में बाढ़ की स्थिति नई नहीं है। उनके मुताबिक, शहर में जल निकासी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।

निर्माण और drainage planning पर सवाल

विधायक ने शहर में हो रहे निर्माण कार्यों की planning पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कई बार निर्माण शुरू करते समय यह ध्यान नहीं दिया जाता कि बारिश का पानी किस रास्ते से बाहर निकलेगा।

उन्होंने प्रशासन की निगरानी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि समय रहते जल निकासी की व्यापक योजना बनाई जाती तो स्थिति इतनी खराब नहीं होती।

नए पुलों की डिजाइन पर भी सवाल

नागेंद्र सिंह ने हाल के वर्षों में बने कुछ पुलों की संरचना को लेकर भी चिंता जताई। उनका दावा है कि पुराने पुलों में नदी के पानी के बहाव के लिए ज्यादा जगह रखी जाती थी। उनकी ऊंचाई और चौड़ाई भी ऐसी होती थी कि पानी आसानी से आगे निकल सके।

इसके मुकाबले नए पुलों में पानी के बहाव के लिए पर्याप्त जगह नहीं छोड़े जाने का उन्होंने आरोप लगाया। उनके मुताबिक, तेज बारिश के दौरान जब नदी में पानी बढ़ता है तो पुल के आसपास पानी के बहाव पर असर पड़ता है और जलभराव की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

पुराने पुलों का उदाहरण देकर समझाया अंतर

विधायक ने रीवा के पुराने ‘बड़ी पुल’ और प्रयागराज के यमुना ब्रिज का उदाहरण दिया। उनका कहना है कि दशकों पहले बनाए गए इन पुलों की ऊंचाई और चौड़ाई ऐसी है कि भारी बारिश के दौरान भी पानी के बहाव में ज्यादा रुकावट नहीं आती।

उन्होंने दावा किया कि इन पुराने पुलों पर कभी पानी नहीं चढ़ा, जबकि बाद में बने कुछ पुलों की क्षमता कम होने के कारण जलभराव की समस्या बढ़ी है।

पूरे रीवा में बाढ़ का असर

नागेंद्र सिंह के अनुसार इस बार की बाढ़ का असर शहर के बड़े हिस्से में देखने को मिला। उनका कहना है कि शायद ही कोई ऐसा मोहल्ला बचा हो जहां घरों में पानी न घुसा हो।

उन्होंने भारी बारिश के साथ-साथ पानी की सीमित निकासी को भी हालात बिगड़ने की वजह बताया। बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब प्रभावित इलाकों में सफाई और सामान्य स्थिति बहाल करने का काम चल रहा है।