UP Election 2027: क्या कांग्रेस अखिलेश की साइकिल को दे पाएगी चुनौती?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अब कुछ ही महीने बाकी हैं, दलों की सियासी तैयारियां तेज हो चुकी हैं। वहीँ सूबे में जमीं तलाश रही कांग्रेस ने इस बार अपनी रणनीति में OBC वोट को खास जगह दी है। पार्टी की हालिया गतिविधियों में OBC नेताओं के साथ बैठक, जाति जनगणना का मुद्दा, सोशल जस्टिस कॉन्फ्रेंस और पिछड़े वर्ग के बीच अभियान जैसे कदम नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस की इस कवायद को उसकी साथी समाजवादी पार्टी के लिए भी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि यूपी की राजनीति में OBC वोट का बड़ा हिस्सा सपा और बीजेपी के सामाजिक समीकरणों से जुड़ा रहा है। कांग्रेस के सामने हालांकि सिर्फ वोटरों तक पहुंचने की चुनौती नहीं है। उसे कमजोर संगठन और मजबूत स्थानीय चेहरे की कमी से भी जूझना होगा।
CWC बैठक से राम मंदिर चंदे के मुद्दे पर कांग्रेस का दांव
19 अगस्त 2026 को दिल्ली में हुई कांग्रेस कार्यसमिति यानी CWC की बैठक में राम मंदिर चंदे से जुड़े मुद्दे को देशभर में उठाने का फैसला किया गया। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘चंदे की चोरी’ को ‘घर-घर चोरी’ का मुद्दा बताते हुए इस मामले पर प्रदर्शन की बात कही। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया।
उत्तर प्रदेश के लिहाज से कांग्रेस का यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी OBC और सामाजिक न्याय के मुद्दों के साथ राम मंदिर से जुड़े मुद्दे को भी अपनी राजनीतिक रणनीति में शामिल कर रही है।
लखनऊ में OBC नेताओं की बैठक, संगठन को सक्रिय करने की कोशिश
कांग्रेस ने 21 अगस्त को लखनऊ प्रदेश मुख्यालय में OBC नेताओं की बैठक बुलाई। इसमें प्रदेश कांग्रेस कमेटी के OBC विंग के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
इससे पहले 18 जुलाई को भी लखनऊ में कांग्रेस OBC प्रकोष्ठ की जिला स्तरीय बैठक हुई थी। लगातार हो रही बैठकों से साफ है कि पार्टी चुनाव से काफी पहले पिछड़े वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
राहुल गांधी की 300 OBC जिला अध्यक्षों के साथ बैठक
कांग्रेस की OBC रणनीति सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। 18 अगस्त को नेता विपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में सात राज्यों के करीब 300 OBC कांग्रेस जिला अध्यक्षों के साथ बैठक की। इसमें उत्तर प्रदेश समेत पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा के पदाधिकारी शामिल हुए।
बैठक में राहुल गांधी ने जातिगत जनगणना के मुद्दे को जनता के बीच ले जाने और OBC अधिकारों के लिए सड़क पर उतरकर आंदोलन करने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘शेर सब्र करता है, जल्दबाजी नहीं।’
कांग्रेस OBC के बीच जातिगत प्रतिनिधित्व और अधिकारों का मुद्दा लगातार उठाने की तैयारी में है। पार्टी का नारा ‘जितनी आबादी, उतना हक’ भी इसी राजनीतिक लाइन का हिस्सा है।
‘बहुजन विचार’ अभियान से पिछड़े और दलित वोटरों तक पहुंचने की तैयारी
2027 के चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ने यूपी में सोशल जस्टिस कॉन्फ्रेंस की सीरीज शुरू करने का फैसला किया है। 22 अगस्त को कानपुर और 23 अगस्त को झांसी में कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
पार्टी ने इस अभियान को ‘बहुजन विचार’ नाम दिया है। OBC विंग के अध्यक्ष मनोज यादव के मुताबिक, अगले एक महीने में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सेमिनार और पदयात्राएं आयोजित की जाएंगी।
इस अभियान का फोकस दलित और पिछड़ा वर्ग समुदायों के बीच पहुंच बढ़ाने पर है। कांग्रेस उन सामाजिक समूहों को दोबारा अपने साथ जोड़ना चाहती है जो लंबे समय से पार्टी के चुनावी आधार का हिस्सा नहीं रहे हैं।
जाति जनगणना को बनाया बड़ा राजनीतिक मुद्दा
कांग्रेस ने 22 अगस्त से जाति जनगणना में OBC कॉलम जोड़ने की मांग को लेकर अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। राहुल गांधी पहले भी जातिगत जनगणना और OBC के लिए समर्पित प्रावधानों की मांग को प्रमुखता से उठाते रहे हैं।
OBC कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जय हिंद ने शाहू महाराज की विरासत को आगे बढ़ाने की बात कही है। कांग्रेस इस मुद्दे को सामाजिक न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के सवाल से जोड़कर आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
कांग्रेस का पुराना सामाजिक समीकरण और नई रणनीति
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का चुनावी आधार लंबे समय तक मुस्लिम, ब्राह्मण और दलित वोटों के समीकरण से जुड़ा रहा। बाद के वर्षों में मुस्लिम वोट का बड़ा हिस्सा सपा की ओर गया, जबकि ब्राह्मण और दलित वोटों में भी कांग्रेस की पकड़ कमजोर हुई।
अब पार्टी OBC, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को जोड़कर नया सामाजिक आधार तैयार करने की कोशिश कर रही है। इस रणनीति में OBC को खास महत्व दिया जा रहा है।
हालांकि, OBC को एकजुट राजनीतिक वर्ग मानना भी आसान नहीं है। अलग-अलग उपजातियों की अपनी राजनीतिक पसंद और क्षेत्रीय प्रभाव हैं। यही वजह है कि कांग्रेस के लिए सिर्फ जाति जनगणना का मुद्दा उठाना पर्याप्त नहीं होगा। उसे संगठन और स्थानीय नेतृत्व के स्तर पर भी इसे जमीन तक ले जाना होगा।
OBC वोट पर कांग्रेस की नजर, सपा और BJP दोनों के लिए चुनौती?
राजनीतिक विश्लेषक सुरेन्द्र दुबे कहते हैं, कांग्रेस की नई रणनीति का सबसे सीधा असर सपा और बीजेपी के सामाजिक समीकरणों पर पड़ सकता है। सपा का प्रमुख आधार यादव और मुस्लिम वोटों से जुड़ा रहा है। कांग्रेस अगर गैर-यादव OBC वर्ग में अपनी जगह बनाती है तो सपा के सामने भी चुनौती खड़ी हो सकती है।
उनका कहना है, बीजेपी के लिए भी OBC वोट महत्वपूर्ण राजनीतिक आधार रहा है। ऐसे में कांग्रेस की सेंधमारी की कोशिश बीजेपी के लिए भी चिंता का कारण बन सकती है। लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि कांग्रेस इन वोटरों को बड़े पैमाने पर अपने साथ जोड़ पाने में सफल होगी।
संगठन और OBC चेहरे की कमी बड़ी चुनौती
यूपी की राजनीति को लगभग एक दशक से कवर रहे पत्रकार राजकुमार उपाध्याय कहते हैं, कांग्रेस की रणनीति के सामने सबसे बड़ी मुश्किल उसका संगठन और मजबूत OBC नेतृत्व है। पार्टी को उत्तर प्रदेश में बूथ स्तर तक अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करनी होगी।
उनका कहना है ये भी संकेत मिल रहे है कि कांग्रेस किसी प्रभावशाली OBC चेहरे को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे सकती है। 2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस ने OBC वोट, जाति जनगणना और सामाजिक न्याय को अपनी रणनीति के केंद्र में रखना शुरू कर दिया है। अब इस रणनीति को संगठन, नेतृत्व और जमीन पर अभियान में कितना बदला जा पाता है, यही इसकी वास्तविक राजनीतिक परीक्षा होगी।
