‘चवन्नी का रुपया’ बयान पर घमासान, जयंत के बाद मायावती ने साधा निशाना

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

लखनऊ: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के ‘चवन्नी का रुपया बना दिया’ वाले बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख जयंत चौधरी के विरोध के बाद अब बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती भी इस विवाद में कूद गई हैं। मायावती ने जयंत चौधरी के आरोपों का समर्थन करते हुए अखिलेश यादव से माफी मांगने की मांग की है।

मायावती ने अखिलेश के बयान को अहंकारी और अशोभनीय बताते हुए कहा कि यह केवल जयंत चौधरी या आरएलडी का मामला नहीं है, बल्कि इससे जाट समाज और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के सम्मान पर भी सवाल उठता है।

क्या है ‘चवन्नी का रुपया’ विवाद?

विवाद अखिलेश यादव के उस बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक सहयोगियों पर तंज कसा था। अखिलेश ने कहा था कि समाजवादी पार्टी ने अपने सहयोगियों को आगे बढ़ाने का काम किया, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग पार्टी का साथ छोड़कर चले गए।

इसी दौरान उन्होंने कहा, “हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी हमें छोड़कर चले गए।”

अखिलेश के इस बयान पर जयंत चौधरी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक कटाक्ष के नाम पर अखिलेश ने जाट समाज को निशाना बनाया। जयंत ने कहा कि अगर अखिलेश को उनसे राजनीतिक शिकायत थी तो उन्हें सीधे उनका नाम लेना चाहिए था, पूरे समाज को निशाने पर लेना उचित नहीं है।

जयंत ने अखिलेश पर अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने इस रवैये को करीब से देखा है और यही अहंकार राजनीतिक पतन की वजह बनता है।

मायावती बोलीं, अखिलेश को मांगनी चाहिए माफी

जयंत चौधरी के बयान के बाद मायावती ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जयंत के आरोपों का समर्थन किया और अखिलेश से माफी मांगने की मांग की।

मायावती ने कहा कि अखिलेश का बयान केवल जयंत चौधरी का अपमान नहीं है, बल्कि इसे जाट समाज और चौधरी चरण सिंह के सम्मान से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए।

1993 के सपा-बसपा गठबंधन की भी दिलाई याद

मायावती ने इस विवाद को सपा-बसपा के पुराने राजनीतिक रिश्तों से भी जोड़ दिया। उन्होंने 1993 के सपा-बसपा गठबंधन का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी पर अहंकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

मायावती के मुताबिक, इसी तरह के रवैये के कारण दोनों दलों का गठबंधन टूट गया था और बाद में स्टेट गेस्ट हाउस कांड जैसी घटना हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि बाद के वर्षों में सपा और बसपा के बीच राजनीतिक गठजोड़ जरूर हुआ, लेकिन अखिलेश यादव ने भी सहयोगियों के प्रति वही रवैया जारी रखा।

‘गिरगिट की तरह रंग बदलती है सपा’, मायावती का हमला

मायावती ने समाजवादी पार्टी पर अपने राजनीतिक सहयोगियों का इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। उनका दावा है कि सपा जरूरत के मुताबिक सहयोगियों के साथ संबंध बनाती है और राजनीतिक हित पूरा होने के बाद उसका रवैया बदल जाता है।

मायावती ने सपा के अलग-अलग राजनीतिक गठबंधनों को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पार्टी का सहयोगियों के प्रति रवैया लगातार इसी तरह का रहा है।

‘PDA में पंडित’ वाले बयान पर भी निशाना

मायावती ने अखिलेश यादव के ‘PDA में पंडित’ वाले बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश अब PDA के ‘P’ को पंडितों से जोड़कर ब्राह्मण समाज को अपने राजनीतिक गठजोड़ का हिस्सा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

मायावती ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी अपने राजनीतिक दावों के बावजूद पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और ब्राह्मण समाज के हितों की वास्तविक हितैषी नहीं रही है।

“मायावती का बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि उन्होंने मौजूदा विवाद को सीधे सपा-बसपा के पुराने टकराव से जोड़ दिया। यानी ‘चवन्नी’ वाली टिप्पणी अब सिर्फ जयंत चौधरी और अखिलेश यादव के बीच की जुबानी जंग नहीं रही, बल्कि विपक्षी खेमे की पुरानी राजनीतिक दरारें भी इसमें दिखाई देने लगी हैं।”