‘शाह पटेल से भी बड़े हो गए?’ वंदे मातरम पर पवन खेड़ा का तीखा हमला

amit-shah-vande-mataram-congress-row
साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

नई दिल्ली: वंदे मातरम को लेकर जारी राजनीतिक विवाद अब कांग्रेस और बीजेपी के बीच तीखी बयानबाजी में बदलता जा रहा है। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए 1937 के उस प्रस्ताव का हवाला दिया, जिसके तहत वंदे मातरम के इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस के तत्कालीन नेतृत्व में निर्णय लिया गया था।

खेड़ा ने सवाल उठाया कि जिस 1937 के प्रस्ताव की अमित शाह आलोचना कर रहे हैं, उसमें सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी और सी. राजगोपालाचारी जैसे नेता शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह निर्णय रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के संदर्भ में लिया गया था।

‘क्या अमित शाह इन सबसे बड़े हो गए?’

पवन खेड़ा ने कहा कि 1937 का प्रस्ताव ही वंदे मातरम को लेकर उस समय का प्रमुख निर्णय था। उन्होंने अमित शाह पर तंज कसते हुए कहा कि पहले वह खुद की तुलना सरदार पटेल से करते थे, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि वह पटेल से भी आगे निकल गए हैं।

खेड़ा ने कहा कि अगर 1937 के प्रस्ताव में उस दौर के इतने बड़े नेता शामिल थे, तो सवाल उठता है कि अमित शाह उस प्रस्ताव की आलोचना करने वाले कौन होते हैं।

उन्होंने कहा, “क्या अमित शाह अब इन सभी से बड़े हो गए हैं कि वे 1937 के रिजोल्यूशन की निंदा कर रहे हैं?”

संविधान सभा के फैसले का भी हवाला

कांग्रेस नेता ने संविधान सभा में वंदे मातरम को लेकर हुए निर्णय का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संविधान सभा में यह तय किया गया था कि वंदे मातरम के शुरुआती दो अंतरे गाए जाएंगे।

खेड़ा ने इसी आधार पर अमित शाह पर हमला बोलते हुए पूछा कि क्या वह संविधान सभा के निर्णय से भी ऊपर हैं।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि देश को यह तय करना होगा कि वह अमित शाह की बात माने या सरदार पटेल, महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर और संविधान सभा के फैसले को।

‘खुद को क्या समझते हैं?’

अमित शाह पर हमला बोलते हुए खेड़ा ने बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने सवाल किया कि आखिर केंद्रीय गृह मंत्री खुद को क्या समझते हैं और उनकी राजनीतिक हैसियत क्या है।

खेड़ा ने कहा कि अमित शाह को अपने पद की जिम्मेदारियों पर ध्यान देना चाहिए, न कि महात्मा गांधी और सरदार पटेल से राजनीतिक तुलना करने की कोशिश करनी चाहिए।

संसद से गैरहाजिरी को लेकर भी घेरा

खेड़ा ने अमित शाह की संसद में कथित गैरहाजिरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री करीब 20 दिनों तक संसद से दूर रहे और अब सामने आए हैं।

इसके बाद उन्होंने हालिया हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर भी अमित शाह से सवाल किए। खेड़ा ने पूछा कि फायरिंग और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था और युवाओं तथा लड़कियों पर लाठीचार्ज का आदेश किसका था।