‘वंदे मातरम्’ विवाद पर जम्मू में कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन, गिरफ्तारी की मांग

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जम्मू में कांग्रेस मुख्यालय से जुड़ा ‘वंदे मातरम्’ विवाद अब पार्टी कार्यालय तक सीमित नहीं रहा। कथित तौर पर राष्ट्रीय गीत के अपमान को लेकर डोगरा फ्रंट के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन किया और मामले में कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी के पोस्टर हाथों में लेकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर हुई कथित घटना को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

उपलब्ध सामग्री के मुताबिक, प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा यह आरोप था कि जम्मू स्थित कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान से जुड़ी मर्यादाओं का कथित तौर पर उल्लंघन हुआ। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं है और कांग्रेस की ओर से इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया भी इसमें दर्ज नहीं है। इसलिए विवाद का मूल आरोप अभी प्रदर्शनकारियों के दावे के रूप में ही सामने आता है।

आरोप से सड़क तक पहुंचा विवाद

डोगरा फ्रंट के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के खिलाफ खुलकर नारेबाजी की। उनके हाथों में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के पोस्टर थे। संगठन का कहना था कि राष्ट्रीय गीत से जुड़े किसी भी कथित अपमान को केवल राजनीतिक विवाद मानकर छोड़ना उचित नहीं होगा और यदि नियम या कानून का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

यहां विवाद का राजनीतिक पहलू भी साफ दिखाई देता है। प्रदर्शन सिर्फ कथित घटना के विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को निशाने पर लेकर नारेबाजी की गई। ऐसे में ‘वंदे मातरम्’ का मुद्दा जम्मू में कांग्रेस और डोगरा फ्रंट के बीच राजनीतिक टकराव का हिस्सा भी बनता दिखा, हालांकि इस प्रदर्शन के आधार पर किसी व्यापक राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचना उपलब्ध सामग्री से संभव नहीं है।

अशोक गुप्ता ने कांग्रेस पर लगाए राजनीतिक आरोप

डोगरा फ्रंट के अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने एबीपी न्यूज से बातचीत में कथित तौर पर ‘वंदे मातरम्’ के अपमान को कांग्रेस की ‘जिन्ना सोच’ से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि इससे पार्टी की विचारधारा उजागर होती है। उन्होंने कांग्रेस की कथित ‘इटली वाली मानसिकता’ का भी उल्लेख किया।

ये टिप्पणियां संगठन के राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें स्वतंत्र तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। उपलब्ध सामग्री में इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र दस्तावेज, आधिकारिक जांच या कांग्रेस की ओर से स्वीकारोक्ति सामने नहीं आती। लिहाजा इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण फर्क यही है कि प्रदर्शनकारियों ने क्या आरोप लगाया और वास्तव में घटना में क्या हुआ—इन दोनों को एक ही तथ्य मानना अभी जल्दबाजी होगी।

कानून का हवाला, कार्रवाई की मांग

प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर संसद में ‘वंदे मातरम्’ के अपमान से जुड़े हालिया कानून या कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि यदि घटना में कानून का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित प्रावधानों के तहत जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

हालांकि, उपलब्ध स्रोत में उस कथित कानून का नाम, उसकी धाराएं, उसके पारित होने की तारीख या उसमें ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े अपराध और सजा का विस्तृत कानूनी प्रावधान उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस रिपोर्ट में किसी विशेष धारा या सजा का दावा नहीं किया जा रहा है। कानूनी कार्रवाई की वास्तविक स्थिति भी उपलब्ध सामग्री से स्पष्ट नहीं होती।

यही इस विवाद का अगला महत्वपूर्ण बिंदु है। किसी राजनीतिक संगठन का आरोप अपने आप में कानूनी दोष सिद्ध नहीं करता। यदि शिकायत दर्ज होती है, जांच शुरू होती है या कोई आधिकारिक कार्रवाई की जाती है, तभी यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित घटना में वास्तव में किसी कानून का उल्लंघन हुआ या नहीं।

पीएम और गृह मंत्री तक मामला ले जाने की मांग

डोगरा फ्रंट ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से मामले का संज्ञान लेने की अपील भी की है। संगठन की मांग है कि कथित तौर पर राष्ट्रीय गीत का अपमान करने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए और दोष साबित होने पर उन्हें सजा मिले।

प्रदर्शनकारियों ने ‘वंदे मातरम्’ को देश की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा महत्वपूर्ण गीत बताते हुए कहा कि इसके सम्मान को लेकर किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। इस बयान के जरिए संगठन ने विवाद को स्थानीय राजनीतिक टकराव से आगे राष्ट्रीय सम्मान के मुद्दे के रूप में पेश करने की कोशिश की है।

लेकिन इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे जरूरी सवाल आरोपों की राजनीतिक तीव्रता नहीं, बल्कि घटना के वास्तविक तथ्य हैं। उपलब्ध सामग्री यह बताती है कि डोगरा फ्रंट ने विरोध किया, आरोप लगाए और कार्रवाई की मांग की। यह सामग्री यह निर्णायक रूप से स्थापित नहीं करती कि कांग्रेस मुख्यालय में वास्तव में ‘वंदे मातरम्’ का अपमान हुआ था।

अब जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया अहम

विवाद के अगले चरण की दिशा दो चीजों से तय होगी—घटना को लेकर आधिकारिक जांच या कार्रवाई और कांग्रेस की प्रतिक्रिया। उपलब्ध सामग्री में कांग्रेस की ओर से इस आरोप का जवाब मौजूद नहीं है। इसलिए उसके पक्ष के बिना पूरे विवाद पर अंतिम निष्कर्ष निकालना पत्रकारिता की दृष्टि से उचित नहीं होगा।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि स्वतंत्रता दिवस से जुड़ा यह विवाद जम्मू में राजनीतिक प्रदर्शन का मुद्दा बन चुका है। डोगरा फ्रंट ने सड़क पर उतरकर कांग्रेस को घेरा है और प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय गृह मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। अब असली सवाल यह है कि क्या कथित घटना को लेकर कोई औपचारिक शिकायत, जांच या कानूनी कार्रवाई सामने आती है। उसी से यह तय होगा कि मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक रहता है या किसी वास्तविक कानूनी प्रक्रिया में आगे बढ़ता है।