हिंदुओं को ‘सहन’ करते हैं मुसलमान? जरदारी के बयान पर जावेद का पलटवार
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का हिंदू अल्पसंख्यकों को लेकर दिया गया एक बयान विवादों में है। पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में जरदारी ने अपने देश में रहने वाले हिंदुओं का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के मुसलमान उन्हें ‘सहन’ करते हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि पाकिस्तान में हिंदू उतने ही स्वतंत्र और अच्छे हैं, जितने वे कहीं और होते।
जरदारी के बयान में इस्तेमाल ‘सहन’ शब्द ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। एक ऐसे समुदाय के संदर्भ में, जिसे पाकिस्तान की आबादी का हिस्सा बताया जा रहा है, इस शब्द के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बयान पर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
मामले में एक दूसरा तथ्य भी सामने आता है। जरदारी ने पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी करीब 3 से 4 प्रतिशत बताई, जबकि 2023 की पाकिस्तान की आधिकारिक जनगणना में दर्ज आंकड़े इससे अलग हैं।
स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में क्या कहा
जरदारी ने यह टिप्पणी 14 अगस्त को इस्लामाबाद में आयोजित यादगार-ए-फतह विजय स्मारक समारोह में की। कार्यक्रम पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित किया गया था।
भाषण के दौरान उन्होंने भारत और पाकिस्तान की राष्ट्रीय पहचान को लेकर दोनों देशों की सोच की तुलना की। उन्होंने भारत के संदर्भ में ‘अखंड भारत’ की विचारधारा का उल्लेख किया और कहा कि दोनों देशों के बीच इतिहास में ऐसी कई चीजें हैं जिन्हें लोग भूल चुके हैं।
इसी दौरान उन्होंने पाकिस्तान में हिंदू आबादी का जिक्र किया। जरदारी ने कहा कि पाकिस्तान एक मुस्लिम देश है और वहां के मुसलमान ऐसे हैं जो ‘सहन’ करते हैं। उन्होंने दावा किया कि देश में करीब 3 से 4 प्रतिशत हिंदू हैं और वे उतने ही स्वतंत्र तथा अच्छे हैं, जितने कहीं और होते।
यहीं उनके बयान का वह हिस्सा सामने आया जिस पर अब सबसे ज्यादा बहस हो रही है—एक अल्पसंख्यक समुदाय के लिए ‘सहन’ शब्द का इस्तेमाल।
‘सहन’ शब्द पर क्यों उठा सवाल
जरदारी के बयान का एक हिस्सा पाकिस्तान में हिंदुओं को स्वतंत्रता मिलने की बात करता है, लेकिन उसी संदर्भ में ‘सहन’ शब्द का इस्तेमाल एक अलग सवाल खड़ा करता है।
किसी अल्पसंख्यक समुदाय को समान नागरिक अधिकारों के संदर्भ में देखने और उसकी मौजूदगी को बहुसंख्यक समुदाय की ‘सहनशीलता’ से जोड़ने के बीच अंतर है। यही वह बिंदु है जिस पर जरदारी के बयान की आलोचना हो रही है।
हालांकि, उपलब्ध सामग्री में इस बयान के बाद पाकिस्तान सरकार की ओर से इस शब्द के इस्तेमाल को लेकर कोई अलग स्पष्टीकरण सामने नहीं दिया गया है। इसलिए फिलहाल विवाद का केंद्र राष्ट्रपति के भाषण में इस्तेमाल किया गया यही शब्द है।
जावेद अख्तर ने क्या कहा
जरदारी की टिप्पणी पर जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राष्ट्रपति के बयान को असंवेदनशील बताया।
अख्तर ने जरदारी की उस टिप्पणी पर सवाल उठाया जिसमें उन्होंने पाकिस्तान की 3 से 4 प्रतिशत हिंदू आबादी को ‘सहन’ करने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि किसी देश के अल्पसंख्यक समुदाय को इस तरह संदर्भित करना उचित नहीं है।
जावेद अख्तर की प्रतिक्रिया के बाद यह विवाद भारत में भी चर्चा का विषय बन गया। हालांकि उनकी प्रतिक्रिया मूल विवाद पर एक सार्वजनिक टिप्पणी है; इसे पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की स्थिति पर स्वतंत्र तथ्यात्मक आकलन के रूप में नहीं देखा जा सकता।
हिंदू आबादी पर जरदारी का दावा
जरदारी ने अपने भाषण में पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी करीब 3 से 4 प्रतिशत बताई। लेकिन उपलब्ध आधिकारिक जनगणना के आंकड़े इससे अलग तस्वीर दिखाते हैं।
पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स की 2023 की जनगणना के मुताबिक, पाकिस्तान में 38,67,729 हिंदू दर्ज किए गए थे। उस समय देश की कुल आबादी 24,04,58,089 दर्ज की गई थी। इन आंकड़ों के आधार पर हिंदू आबादी कुल जनसंख्या की करीब 1.61 प्रतिशत बैठती है।
जनगणना में 13,49,487 लोगों को अनुसूचित जाति की श्रेणी में भी अलग से दर्ज किया गया था। यह कुल आबादी का करीब 0.56 प्रतिशत है।
आंकड़ों में कितना अंतर
यदि जनगणना में दर्ज हिंदू और अनुसूचित जाति की दोनों श्रेणियों को जोड़ दिया जाए तो संख्या 52,17,216 होती है। यह कुल जनसंख्या का करीब 2.17 प्रतिशत है।
इस गणना के आधार पर भी आधिकारिक आंकड़ा 3 से 4 प्रतिशत के बीच नहीं पहुंचता। सिर्फ हिंदू आबादी की श्रेणी देखें तो अनुपात करीब 1.61 प्रतिशत है और हिंदू तथा अनुसूचित जाति के आंकड़ों को मिलाकर भी यह करीब 2.17 प्रतिशत बनता है।
इसलिए जरदारी द्वारा भाषण में बताए गए 3 से 4 प्रतिशत के आंकड़े और 2023 की आधिकारिक जनगणना में दर्ज आंकड़ों के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
विवाद अब दो मोर्चों पर
जरदारी के बयान ने अब दो अलग-अलग सवालों को जन्म दिया है। पहला सवाल उनके द्वारा हिंदू समुदाय के संदर्भ में इस्तेमाल की गई ‘सहन’ वाली भाषा को लेकर है। दूसरा सवाल उनके भाषण में बताए गए हिंदू आबादी के आंकड़े और आधिकारिक जनगणना के आंकड़ों के बीच अंतर का है।
इस पूरे विवाद में तीन अलग-अलग बातें अलग रखना जरूरी है। जरदारी ने क्या कहा, जावेद अख्तर ने उस पर क्या प्रतिक्रिया दी और पाकिस्तान की आधिकारिक जनगणना क्या बताती है—तीनों एक ही चीज नहीं हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में जरदारी का बयान, उस पर जावेद अख्तर की आपत्ति और 2023 की जनगणना के आंकड़े सामने हैं। विवाद की सबसे ठोस तथ्यात्मक कड़ी आबादी के आंकड़ों में दिखाई देने वाला अंतर है, जबकि ‘सहन’ शब्द को लेकर विवाद मुख्य रूप से बयान की भाषा और उसके अर्थ को लेकर है।
