अमेरिका ने सऊदी को क्यों छोड़ा? हूतियों से सीक्रेट बातचीत का खुलासा

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

यमन (Yemen) में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) के लगातार बढ़ते हमलों से निपटने के लिए सऊदी अरब कड़ा संघर्ष कर रहा है। इसी बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने मध्य पूर्व की कूटनीति में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब का सबसे बड़ा सहयोगी माना जाने वाला अमेरिका उसकी पीठ पीछे हूतियों के साथ एक ‘सीक्रेट डील’ (Secret Deal) कर चुका है।

इस गुप्त वार्ता के खुलासे के बाद सऊदी अरब खुद को अलग-थलग महसूस कर रहा है और यमन संकट के और गहराने की आशंका पैदा हो गई है।

ओमान में हुई ‘सीक्रेट’ मुलाकात

जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों के बीच ओमान की राजधानी मस्कट (Muscat) में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।

  • हूती प्रतिनिधिमंडल: इस बैठक में मोहम्मद अब्दुलसलाम और अब्देलमलिक अल-अजीरी जैसे वरिष्ठ हूती नेता शामिल हुए।

  • डील की शर्तें: बताया जा रहा है कि इस वार्ता के दौरान हूतियों ने अमेरिका से वादा किया है कि वे लाल सागर में किसी भी अमेरिकी जहाज को निशाना नहीं बनाएंगे और 2025 में हुए सीजफायर (युद्धविराम) के नियमों का पालन करेंगे।

  • इजरायल पर खतरा बरकरार: हूतियों ने स्पष्ट किया है कि वे इजरायली जहाजों को निशाना बनाना जारी रखेंगे।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका और हूतियों के बीच सीधी बातचीत चल रही है और अमेरिकी प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

बाब-अल-मंदेब पर कब्जा और सऊदी अरब की चिंता

अमेरिका के इस कदम ने सऊदी अरब की चिंताओं को कई गुना बढ़ा दिया है।

  • लाल सागर तट पर कब्जा: हूती विद्रोहियों ने पिछले हफ्ते अचानक बड़ा हमला करते हुए यमन के लाल सागर तट और अहम बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab-al-Mandeb Strait) के कई द्वीपों पर अपना कब्जा जमा लिया है। यह रास्ता सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए जीवनरेखा माना जाता है।

  • मक्का पर ड्रोन हमले का साया: हूतियों की ओर से दागी जा रही मिसाइलें और ड्रोन लगातार सऊदी अरब के प्रमुख शहरों के लिए खतरा बने हुए हैं। हाल ही में पवित्र शहर मक्का की ओर दागे गए ड्रोन और मिसाइलों के कारण वहां सिक्योरिटी अलार्म तक बजने लगे थे।

इस पूरे घटनाक्रम पर सऊदी अरब का साफ तौर पर आरोप है कि ऐसे संकट के समय में उसका कोई भी सहयोगी देश, विशेषकर अमेरिका, उसका साथ नहीं दे रहा है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी मक्का के पास हुए इन ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है।