रायबरेली से अखिलेश का सीट शेयरिंग फॉर्मूला, ‘जो जीतेगा वही सीट लेगा’

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राघवेन्द्र मिश्रा
राघवेन्द्र मिश्रा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस के परंपरागत गढ़ और राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से अपनी ‘पीडीए रथ यात्रा’ (PDA Rath Yatra) का आगाज किया। यात्रा की शुरुआत के साथ ही अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ गठबंधन और सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।

सपा अध्यक्ष ने साफ शब्दों में कहा कि गठबंधन जरूर होगा, लेकिन सीटों का फैसला महज संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि ‘जीतने की क्षमता’ (Winnability) के आधार पर तय किया जाएगा।

‘गठबंधन भी होगा और चुनौती भी’

रायबरेली में रथ यात्रा के दौरान अखिलेश यादव ने गठबंधन की भावी रूपरेखा पर चर्चा करते हुए कहा, “गठबंधन भी होगा और उसके साथ चुनौती भी होगी। हमारे लिए बात केवल सीटों की संख्या की नहीं बल्कि ‘जीतने वाली सीट’ की होगी। जिस दल के जीतने की सबसे ज्यादा संभावना होगी, सीट उसी के खाते में जानी चाहिए।”

राजनीतिक विश्लेषक अखिलेश के इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी की ओर से तय की जा रही शर्तों के तौर पर देख रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने साथ मिलकर बेहतर प्रदर्शन किया था, लेकिन 403 विधानसभा सीटों वाले राज्य में अब सपा संख्या बल के बजाय सीटों के ग्राउंड गणित को आगे रख रही है।

राहुल के गढ़ रायबरेली से ही क्यों शुरू हुई यात्रा?

समाजवादी पार्टी द्वारा अपने चुनावी अभियान की शुरुआत के लिए रायबरेली को चुनना सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। रायबरेली लोकसभा सीट वर्तमान में कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है।

इस संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाली 5 विधानसभा सीटों का समीकरण देखें तो:

  • 3 सीटों पर समाजवादी पार्टी के विधायक काबिज हैं।

  • 2 सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास हैं।

  • कांग्रेस का यहां फिलहाल कोई विधायक नहीं है।

ऐसे में अखिलेश यादव का इसी जिले से यात्रा शुरू करना और वहीं से सीट बंटवारे पर दो-टूक बात कहना संकेत देता है कि सपा अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में कांग्रेस के दबाव में सीटें छोड़ने के मूड में नहीं है।

2027 की लड़ाई: ‘BJP बनाम PDA’

अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनाव को सीधे तौर पर ‘BJP बनाम PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का मुकाबला करार दिया। उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव में ‘वोट का बुलडोजर’ चलेगा। अपने संबोधन में उन्होंने PDA के मुद्दों को आरक्षण, सामाजिक सम्मान और जातीय भाईचारे से जोड़ते हुए स्पष्ट किया कि सपा केवल गठबंधनों के गणित पर निर्भर रहने के बजाय अपने मूल सामाजिक समीकरण को जमीन पर मजबूत करने में जुटी है।

रथ यात्रा के दौरान अखिलेश यादव ने रायबरेली मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में दर्शन-पूजन किया, जहां उन्हें गदा भेंट की गई। यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने बुलडोजर खड़े कर फूल बरसाते हुए उनका स्वागत किया।

दोनों दलों में आंतरिक सर्वे जारी, सीटों पर खींचतान के आसार

अगस्त में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों ही उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर अपने-अपने स्तर से आंतरिक सर्वे करा रही हैं। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि सीटों के बंटवारे पर बातचीत जल्द से जल्द शुरू और फाइनल हो, ताकि उम्मीदवारों को तैयारी का पूरा समय मिल सके।

सपा अध्यक्ष के ताजा रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी वार्ताओं में सीटों की दावेदारी का मुख्य पैमाना जमीनी पकड़ और जीत की संभावना ही रहेगा। आने वाले महीनों में दोनों दलों के रणनीतिकार सीटों की इस कसौटी पर किस तरह आम सहमति बनाते हैं, इस पर पूरे विपक्षी खेमे की नजर रहेगी।