नाना पाटेकर के सामने UP DGP ने फिल्मों की पुलिस पर ली चुटकी

हिंदी फिल्मों में पुलिस की एंट्री को लेकर एक पुराना फिल्मी अंदाज रहा है। हीरो और विलेन के बीच पूरी कहानी आगे बढ़ चुकी होती है, मामला लगभग खत्म हो जाता है और तभी सायरन बजाती हुई पुलिस की गाड़ी पहुंचती है। अब उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने इसी पुराने फिल्मी फॉर्मूले पर अभिनेता नाना पाटेकर के सामने मजेदार टिप्पणी कर दी।
साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट के खिलाफ जागरूकता अभियान से जुड़े एक कार्यक्रम में यूपी के डीजीपी ने हिंदी फिल्मों में पुलिस की भूमिका पर चुटकी ली। उन्होंने कहा कि फिल्मों में अक्सर पुलिस तब पहुंचती दिखाई जाती है, जब विलेन अपना पूरा काम कर चुका होता है।
डीजीपी ने यह बात नाना पाटेकर की मौजूदगी में कही। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि चूंकि नाना पाटेकर खुद कार्यक्रम में मौजूद हैं, इसलिए इस शिकायत के बाद कार्रवाई की उम्मीद भी की जा सकती है। उनकी इस टिप्पणी पर मंच का माहौल हल्का हो गया और नाना पाटेकर भी मुस्कुराते नजर आए।
साइबर ठगी के खिलाफ नाना पाटेकर के साथ UP पुलिस
यह पूरा कार्यक्रम किसी फिल्मी बहस के लिए नहीं, बल्कि साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर ठगी और तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों को लेकर लोगों को सतर्क करने के लिए नाना पाटेकर के साथ एक शॉर्ट फिल्म तैयार की है।
इस फिल्म में नाना पाटेकर एक जागरूक नागरिक की भूमिका में नजर आते हैं। कहानी के जरिए लोगों को यह समझाने की कोशिश की गई है कि साइबर अपराधी किस तरह डर और दबाव का इस्तेमाल करके लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं और पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं।
DGP ने फिल्मों के पुराने पुलिस फॉर्मूले पर कसा तंज
कार्यक्रम के दौरान डीजीपी ने इसी मौके को हल्के-फुल्के अंदाज में इस्तेमाल किया। उन्होंने हिंदी सिनेमा में पुलिस की पारंपरिक छवि का जिक्र करते हुए कहा कि फिल्मों में पुलिस की गाड़ी अक्सर तब पहुंचती है, जब अपराधी अपना काम पूरा कर चुका होता है।
नाना पाटेकर के सामने कही गई यह बात इसलिए भी दिलचस्प रही क्योंकि अभिनेता खुद लंबे समय से फिल्मों का हिस्सा रहे हैं और पुलिस, अपराध तथा व्यवस्था से जुड़े कई किरदार पर्दे पर निभा चुके हैं।
डीजीपी की टिप्पणी का मकसद फिल्मों की आलोचना करना नहीं, बल्कि कार्यक्रम के माहौल में एक हल्का-फुल्का संदर्भ जोड़ना था। इसके बाद कार्यक्रम का मुख्य फोकस फिर साइबर अपराध और उससे बचाव पर रहा।
योगी आदित्यनाथ ने भी डिजिटल अरेस्ट को लेकर किया सावधान
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी लोगों को साइबर ठगी के नए तरीकों से सतर्क रहने की अपील की। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी में अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या किसी सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों पर दबाव बनाते हैं।
ऐसे मामलों में पीड़ित को फोन या वीडियो कॉल के जरिए डराया जाता है और उससे कहा जाता है कि वह किसी कानूनी मामले में फंस गया है। इसके बाद जांच, गिरफ्तारी या कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर कराने की कोशिश की जाती है।
यूपी पुलिस का नाना पाटेकर के साथ बनाया गया जागरूकता अभियान इसी तरह के साइबर अपराधों को लेकर लोगों को सावधान करने की कोशिश है।
और इसी गंभीर मुद्दे के बीच यूपी डीजीपी की फिल्मों वाली टिप्पणी ने कार्यक्रम को कुछ देर के लिए हल्का जरूर कर दिया—खासकर इसलिए क्योंकि शिकायत सीधे उस शख्स के सामने दर्ज हुई, जो दशकों से हिंदी सिनेमा का हिस्सा रहा है।
