दूषित पानी से दक्षिण अफ्रीका में हाहाकार, 500 से ज्यादा बीमार, घिर गईं मेयर

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अजमल शाह
अजमल शाह

दक्षिण अफ्रीका में दूषित पानी पीने से 500 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं। पेट में ऐंठन और डायरिया जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (gastrointestinal) बीमारी का प्रकोप मुख्य रूप से देश के दो अलग-अलग शहरों में फैला है। राजधानी प्रिटोरिया के पूर्वी इलाकों में प्रशासन ने लोगों को नल का पानी पीने से रोक दिया है। यहां अब तक 408 लोगों को इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया है।

3 हफ्ते से पानी में नहीं मिलाया गया क्लोरीन

प्रिटोरिया और उसके आसपास के इलाकों में पानी की आपूर्ति करने वाले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की भारी लापरवाही सामने आई है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि प्लांट में पिछले करीब तीन हफ्तों से पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन (chlorination) का इस्तेमाल नहीं किया गया था। नगर पालिका को अपने नियमित सप्लायर से क्लोरीन हासिल करने में परेशानी आ रही थी।

यह प्लांट ब्रोंखोर्स्टस्प्रूट नदी (Bronkhorstspruit River) से पानी लेता है, जो पहले से ही खराब पड़े अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों के सीवेज से बुरी तरह प्रदूषित है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, दूषित पानी पीने के कारण बीमार पड़ने वालों में सबसे बड़ी संख्या 4 साल से कम उम्र के बच्चों की है।

मेयर ने मानी गलती, राजनीतिक बवाल शुरू

तशवाने (Tshwane) शहर, जिसके अंतर्गत प्रिटोरिया और आसपास के इलाके आते हैं, की मेयर नसिफी मोया ने स्वीकार किया कि अधिकारियों ने जनता को खतरे की चेतावनी नहीं दी।

मोया ने कहा कि जांच में सामने आया है कि शहर के अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों को यह नहीं बताया कि पानी में क्लोरीन नहीं मिलाया गया है और इसे पीने, खाना पकाने, या नहाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। पानी को उबालने के बाद भी इस्तेमाल करने से मना किया गया है।

इस खुलासे के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों ने मेयर मोया के इस्तीफे और जिम्मेदार अधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग तेज कर दी है। संकट से निपटने के लिए शहर के अधिकारी इमरजेंसी टैंकरों के जरिए निवासियों को पानी बांट रहे हैं। स्वयंसेवी संस्था ‘गिफ्ट ऑफ द गिवर्स’ (Gift of the Givers) भी प्रभावित समुदाय को बोतलबंद पानी की आपूर्ति कर रही है।

यूनिवर्सिटी के 100 से ज्यादा छात्र भी अस्पताल में

प्रिटोरिया के अलावा तटीय शहर गकेबरहा (Gqeberha) में भी हालात खराब हैं। रोड्स यूनिवर्सिटी (Rhodes University) प्रशासन ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में उनके कम से कम 111 छात्रों का गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारी के लिए इलाज किया गया है।

यूनिवर्सिटी और जल विभाग के अधिकारी इस आउटब्रेक के कारणों की जांच कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ओलवेतु गवान्या के मुताबिक, गंभीर लक्षणों वाले छात्रों को अस्पताल ले जाया गया था और अब वे कैंपस लौट आए हैं। उन्होंने स्टाफ और छात्रों को सतर्क रहने और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।

कैंपस और उसके बाहर सुरक्षा उपायों के तहत लोगों को उबला हुआ या बोतलबंद पानी पीने, खाना बनाने में सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करने और बिना ट्रीट किए गए पानी में कच्चा खाना या बर्फ धोने से बचने के निर्देश दिए गए हैं।