हूतियों का हमला, अरामको की इमारत में आग; रियाद में मिसाइलों का मलबा

UAE
शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए गए ताजा मिसाइल हमलों ने मध्य पूर्व में तनाव को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है। मंगलवार शाम सऊदी अरामको (Saudi Aramco) की एक प्रशासनिक इमारत पर हुए हमले से वहां आग लग गई। वहीं, राजधानी रियाद के आसमान में हवा में ही नष्ट की गई क्रूज मिसाइलों के मलबे से 4 नागरिक घायल हो गए और कई घरों को नुकसान पहुंचा है। इन हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूतियों और उनके समर्थक ईरान को सख्त चेतावनी दी है। जवाब में हूती विद्रोहियों ने भी अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की खुली धमकी दे दी है।

रियाद में गिरे मिसाइल के टुकड़े, अरामको की इमारत में आग

सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, पूर्वी प्रांत के ढहरान (Dhahran) स्थित सऊदी अरामको की एक प्रशासनिक इमारत पर मंगलवार शाम हमला किया गया। इससे इमारत में आग लग गई, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

दूसरी तरफ, सऊदी नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने बताया कि रियाद के आसमान में अरब गठबंधन सेना द्वारा दो हूती क्रूज मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर नष्ट किया गया। इन मिसाइलों का मलबा रियाद के रिहायशी इलाकों में गिरा, जिससे 15 घरों को नुकसान पहुंचा है। मलबे की चपेट में आने से दो महिलाओं, एक पुरुष और एक बच्चे सहित कुल चार लोग घायल हुए हैं। हमले के दौरान रियाद के निवासियों के फोन पर “हवाई खतरे” का आपातकालीन अलर्ट भी भेजा गया था। इसके कुछ समय बाद रियाद के दक्षिण में स्थित अल खर्ज (Al Kharj) में भी इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया, जिसे बाद में सुरक्षित घोषित कर दिया गया।

ट्रंप की चेतावनी: हूतियों का बर्ताव ‘बहुत खराब’, ईरान पर होगा फैसला

हमलों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूतियों के व्यवहार को “बहुत खराब” करार दिया है। अपने ‘ट्रुथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर ट्रंप ने कहा कि हूती विद्रोही संभवतः ईरान के इशारे पर काम कर रहे हैं और अमेरिका जल्द ही ईरान को लेकर बड़ा फैसला करेगा। उन्होंने नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद सऊदी अरब के साथ मिलकर हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होने के संकेत दिए हैं।

इस बीच, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के आदेश पर पेंटागन ने ईरानी मिसाइल, ड्रोन और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए कई दिनों के हवाई हमले (Air Campaign) का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) के नेतृत्व में शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों ने कैंप डेविड में इन विकल्पों की समीक्षा की है। इसके साथ ही, घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने ‘डिफेंस प्रोडक्शन एक्ट’ लागू करते हुए टेक्सास में एक नई रिफाइनरी के विस्तार की घोषणा की है।

हूतियों की अमेरिका को पलटवार की धमकी

अमेरिकी चेतावनी के बाद हूती विद्रोहियों ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है। हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल बुखैती ने वाशिंगटन को हस्तक्षेप न करने की चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर अमेरिका ने कोई सैन्य कदम उठाया, तो मध्य पूर्व में मौजूद सभी अमेरिकी हितों को निशाना बनाया जाएगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर विवाद और ईरान का ठप होता तेल निर्यात

समुद्री सुरक्षा को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच भी जुबानी जंग तेज हो गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के उस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण है। सेंटकॉम ने स्पष्ट किया कि जलडमरूमध्य अमेरिका और उसके सहयोगियों के नियंत्रण में है और सोमवार को ही वहां से 19 मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल सुरक्षित निकाला गया है।

दूसरी ओर, अमेरिकी नाकाबंदी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच रहा है। एनर्जी इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ‘वोर्टेक्सा’ (Vortexa) के अनुसार, सितंबर के दूसरे सप्ताह में गिरावट के बाद अक्टूबर में ईरान का समुद्री कच्चा तेल निर्यात शून्य (Zero) पर आ गया है। अमेरिका की सख्त घेराबंदी के चलते ईरान के करीब 83 मिलियन बैरल कच्चे तेल से भरे टैंकर समुद्र में फंसे हुए हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा और उड़ानों पर असर

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने चेतावनी दी है कि सऊदी अरब पर हो रहे इन हमलों का नकारात्मक प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ सकता है, क्योंकि इससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें बढ़ेंगी। बुधवार को एशियाई बाजारों में ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.8% बढ़कर 106.58 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

हमलों के कारण सऊदी अरब के हवाई यातायात पर भी गहरा असर पड़ा है। इंडिगो के बाद अब श्रीलंकन एयरलाइंस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए 18 अक्टूबर तक रियाद और दम्माम के लिए अपनी सभी उड़ानें निलंबित कर दी हैं।

हमलों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा हो रही है। मुस्लिम वर्ल्ड लीग (MWL) के महासचिव डॉ. मोहम्मद अल-इस्सा ने हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के आत्मरक्षा के अधिकार का पूर्ण समर्थन करते हुए कहा है कि पाकिस्तान क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर सऊदी अरब के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।