पेंशन फंड की निगरानी पर सवाल, PM मोदी को पत्र; CAG ऑडिट की मांग

देश के लाखों सरकारी कर्मचारियों की पेंशन बचत और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के प्रबंधन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकारी कर्मचारियों के प्रमुख संगठन ‘ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन’ (AINPSEF) ने एनपीएस के तहत किए जाने वाले प्रस्तावित निवेश और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
17,000 करोड़ रुपये के वैकल्पिक निवेश पर सवाल
फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल द्वारा भेजे गए पत्र के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2026 को एनपीएस दिवस के अवसर पर पेंशन फंड नियामक व विकास प्राधिकरण (PFRDA) और एनपीएस ट्रस्ट ने वैकल्पिक निवेश फंड (AIF), प्राइवेट इक्विटी, वेंचर कैपिटल और स्टार्टअप्स में लगभग 17,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
संगठन का मुख्य सवाल यह है कि जब कर्मचारियों के अंशदान पर न्यूनतम रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है, तो इतनी बड़ी पूंजी ऐसे जोखिम भरे क्षेत्रों में क्यों झोंकी जा रही है। फेडरेशन ने इस बात पर जोर दिया है कि कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई और रिटायरमेंट फंड की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।

800 करोड़ के निवेश में देरी और फीस का मुद्दा
पत्र में वित्त मंत्रालय द्वारा 8 जुलाई 2026 को यूपीएस (UPS) कॉर्पस में जमा कराए गए 800 करोड़ रुपये के निवेश में हुई देरी का भी जिक्र किया गया है। फेडरेशन का दावा है कि समय पर निवेश न होने के कारण ब्याज के रूप में 2 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है, जिसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
इसके अलावा, संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि पेंशन फंड से हर साल लगभग 2,500 करोड़ रुपये विभिन्न सेवाओं और फीस के रूप में दिए जा रहे हैं, इसके बावजूद फंड के प्रदर्शन और रिटर्न की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
फेडरेशन की प्रमुख मांगें:
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CAG ऑडिट: NPS ट्रस्ट, निजी कंसल्टेंट्स की नियुक्ति और AIF निवेश की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच।
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न्यूनतम रिटर्न की गारंटी: EPFO की तर्ज पर NPS में भी कर्मचारियों को कम से कम 8.25% सालाना रिटर्न की गारंटी दी जाए।
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हितों के टकराव की जांच: NPS ट्रस्ट के शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों की अन्य संस्थाओं में दोहरी भूमिकाओं और हितों के टकराव (Conflict of Interest) की जांच हो।
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UPS और NPS का विकल्प: कर्मचारियों को सेवाकाल के दौरान इनमें से किसी एक योजना को चुनने की स्पष्ट सुविधा मिले।
AINPSEF ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो 20 दिसंबर को PFRDA कार्यालय का घेराव किया जाएगा। इस पूरे मामले पर अब सरकार और संबंधित प्राधिकरण के आधिकारिक पक्ष का इंतजार है।

