जब IMF ने फेर लिया मुंह, निर्मला सीतारमण के एक दखल ने ऐसे बदली बाजी

नई दिल्ली/कोलंबो: श्रीलंका के 2022 के भीषण आर्थिक संकट के दौरान भारत ने न सिर्फ उसे सीधे तौर पर आर्थिक मदद दी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी एक सच्चे पड़ोसी की भूमिका निभाई। श्रीलंका के पूर्व वित्त मंत्री अली साबरी ने एक पॉडकास्ट में खुलासा किया है कि कैसे भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एक कूटनीतिक हस्तक्षेप ने नकारात्मक रुख अपना चुके अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का नजरिया रातों-रात बदल दिया था।
IMF का नकारात्मक रवैया और निराशा
संकट के दौरान अली साबरी को वॉशिंगटन में IMF नेतृत्व के साथ बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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शुरुआती दौर में IMF के क्षेत्रीय निदेशकों का रवैया श्रीलंका को लेकर काफी निराशाजनक और नकारात्मक था।
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अधिकारियों का तर्क था कि श्रीलंका का पिछला रिकॉर्ड ठीक नहीं है और इस बार भी हालात सुधरने की उम्मीद कम है।
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इस रुख के कारण श्रीलंकाई प्रतिनिधिमंडल IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा के साथ होने वाली अगली बैठक को लेकर बेहद चिंतित था।
निर्मला सीतारमण की ‘गेमचेंजिंग’ मुलाकात
क्रिस्टालिना जॉर्जीवा और तत्कालीन डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ के साथ साबरी की दोपहर 3 बजे की अहम बैठक थी। इससे ठीक पहले साबरी की मुलाकात निर्मला सीतारमण से हुई।
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साबरी द्वारा IMF की हिचकिचाहट साझा करने पर सीतारमण ने भरोसा दिलाया कि वह खुद जॉर्जीवा से मिलकर श्रीलंका की मजबूती से पैरवी करेंगी।
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जब साबरी शीर्ष नेतृत्व के साथ अपनी तय बैठक में पहुंचे, तो वहां का माहौल पूरी तरह से सकारात्मक हो चुका था।
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जॉर्जीवा ने साबरी को बताया कि सीतारमण के साथ उनकी अभी हुई बैठक का 70 से 80 फीसदी हिस्सा भारत के बजाय केवल श्रीलंका को तत्काल मदद पहुंचाने के मुद्दे पर केंद्रित था।
भारत बना वित्तीय आश्वासन देने वाला पहला देश
उस मुश्किल दौर में श्रीलंका के पास विदेशी मुद्रा भंडार पूरी तरह खाली था। IMF से बेलआउट पैकेज हासिल करने के लिए श्रीलंका को अपने प्रमुख कर्जदाताओं से वित्तीय आश्वासन (Financial Assurance) की सख्त जरूरत थी।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत IMF को यह वित्तीय आश्वासन देने वाला पहला प्रमुख द्विपक्षीय कर्जदाता बनकर उभरा।
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भारत की इसी गारंटी और कूटनीतिक समर्थन के बाद IMF ने श्रीलंका के लिए करीब 3 अरब डॉलर के विस्तारित फंड सुविधा (EFF) कार्यक्रम को हरी झंडी दिखाई।
अली साबरी के अनुसार, भारत ने केवल सामान और पैसा ही नहीं दिया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सामने श्रीलंका की पैरवी कर उसकी आर्थिक रिकवरी की सबसे मजबूत नींव रखी।
