Nigeria Stockfish: नाइजीरिया में क्यों महंगा हुआ नॉर्वे का ‘स्टॉकफिश’?

Stockfish
Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

नाइजीरिया (Nigeria) के गरीब और निम्न आय वाले परिवारों के लिए प्रोटीन का एक प्रमुख और लोकप्रिय स्रोत माने जाने वाले ‘स्टॉकफिश’ (Stockfish – सूखी कॉड मछली) की कीमतें इन दिनों आसमान छू रही हैं।

इस बढ़ती महंगाई को लेकर नॉर्वे के सीफूड निर्यातकों और उद्योग हितधारकों ने गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कॉड (Cod) मछली के उत्पादन में भारी गिरावट, कच्चे माल की बढ़ती लागत और नाइजीरियाई सरकार द्वारा लगाए गए उच्च आयात शुल्क (Import Duties) के कारण स्टॉकफिश की कीमतें बेतहाशा बढ़ी हैं, जिससे यह आम लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है।

लागोस (Lagos) में स्टॉकफिश बाजारों और आयातकों के दौरे के दौरान नॉर्वे के निर्यातकों ने नाइजीरिया की संघीय सरकार से आयात शुल्क की समीक्षा करने की अपील की है। उन्होंने विशेष रूप से ‘स्टॉकफिश हेड्स’ (मछली के सिर वाले हिस्से) पर टैक्स कम करने की मांग की, जिसे लाखों नाइजीरियाई लोगों के लिए प्रोटीन का एक सस्ता और सुलभ जरिया माना जाता है।

30 सालों के सबसे निचले स्तर पर मछली का उत्पादन

नॉर्वेजियन सीफूड काउंसिल (Norwegian Seafood Council) के अफ्रीका मामलों के निदेशक जॉनी हैबर्ग (Johnny Haaberg) ने बताया कि स्टॉकफिश उत्पादन के लिए उपलब्ध मछली की मात्रा पिछले तीन दशकों से अधिक समय में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई है।

उन्होंने स्पष्ट किया:

“यह सच है कि फिलहाल स्टॉकफिश की कीमतें बहुत ज्यादा हैं, और इसका मुख्य कारण यह है कि मछली (Cod) की पकड़ ही 1991 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर है। जब बाजार में उत्पाद की आपूर्ति (Supply) कम होती है और मांग (Demand) वही रहती है, तो वैश्विक स्तर पर कीमतें अपने आप बढ़ जाती हैं।”

हैबर्ग ने बताया कि यह समस्या केवल नाइजीरिया तक सीमित नहीं है, बल्कि नॉर्वे से स्टॉकफिश आयात करने वाले सभी देशों के बाजार इस कमी और उच्च कीमतों का सामना कर रहे हैं।

आयात शुल्क और आम आदमी पर बढ़ता बोझ

कीमतों के इस अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच स्थानीय नीतियां नाइजीरियाई उपभोक्ताओं का बोझ और बढ़ा रही हैं। नाइजीरिया में नॉर्वेजियन सीफूड काउंसिल की मत्स्य सलाहकार अबियोदुन ओरित्सेजेमाइन चेके (Abiodun Oritsejemine Cheke) ने बताया कि सरकार ने जुलाई 2025 में स्टॉकफिश पर आयात शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया था। यह फैसला ऐसे समय में आया जब अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति की कमी पहले से ही कीमतों को ऊपर धकेल रही थी।

उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए कहा:

“सरकार को आम जनता पर रहम खाना चाहिए और हमें जीरो प्रतिशत ड्यूटी देनी चाहिए। स्टॉकफिश गरीबों का उत्पाद है। बाजारों में यह 500 से 1,000 नायरा (Naira – नाइजीरियाई मुद्रा) तक के छोटे हिस्सों में बिकती है, जो गरीब जनता को जीवित रखने का काम कर रही है।”

उन्होंने इसकी तुलना अंडों से करते हुए कहा कि आज एक अंडे की कीमत करीब 300 नायरा है, जिसे ज्यादा से ज्यादा दो लोग बांट सकते हैं। लेकिन अगर 300 नायरा की स्टॉकफिश के टुकड़े खरीदे जाएं, तो छह लोगों का पूरा परिवार इसके साथ बनने वाले पारंपरिक ‘एगुसी सूप’ (Egusi soup) का आनंद ले सकता है।

क्या भविष्य में कम होंगी कीमतें?

उत्पादन लागत को लेकर ‘विला सीफूड एएस’, नॉर्वे की सेल्स मैनेजर लिसा वेस्टफाल ने कहा, “नॉर्वेजियन उत्पादकों को स्टॉकफिश के लिए कच्चा माल बहुत अधिक कीमतों पर खरीदना पड़ रहा है। जब कोटा में भारी कटौती हुई है, तो कीमतों को कम करने की एक सीमा होती है।”

हालांकि, इस संकट के बीच कुछ उम्मीद की किरण भी है। हितधारकों ने आशा जताई है कि 2025 और 2026 में कॉड मछली के संरक्षण के लिए लगाए गए प्रतिबंधों से मछलियों की आबादी में सुधार हुआ है। ‘सागा फिस्क एएस’ के मैनेजर एर्लिंग फाल्च ने कहा कि अगले साल नॉर्वे और आइसलैंड में कोटा बढ़ने की उम्मीद है। यदि ऐसा होता है, तो बाजार में अधिक मछलियां उपलब्ध होंगी, जिससे कीमतों में कुछ गिरावट आ सकती है।