नेपाल में ग्लेशियर तबाही, 700 की मौत; पुनर्निर्माण को चाहिए $5 अरब

nepal-china-border-flood-disaster-nine-dead-many-missing_V_jpg--1280x720-4g
अजमल शाह
अजमल शाह

26 अगस्त को नेपाल में ग्लेशियर टूटकर झील फटने से आई भयानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में देश के 8 जिले पूरी तरह तबाह हो गए हैं। Gen-Z के विरोध प्रदर्शनों के बाद सत्ता में आई बालेन शाह की सरकार के सामने अब इन जिलों के पुनर्निर्माण और प्रभावित लोगों के पुनर्वास की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

33 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की जरूरत

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आपदा से नेपाल को लगभग 200 अरब नेपाली रुपये का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने आशंका जताई है कि 8 जिलों को फिर से बसाने के लिए 4-5 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 33,000 करोड़ से 41,500 करोड़ रुपये) की जरूरत होगी। बाढ़ के कारण अब तक 700 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि एक लाख घर तबाह होने की सूचना है। इससे पहले 2015 के विनाशकारी भूकंप में 9000 लोग मारे गए थे और करीब 5 लाख घर नष्ट हुए थे, जिसके पुनर्निर्माण में 9 अरब डॉलर का खर्च आया था।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और पर्यटन उद्योग ठप

बाढ़ ने नेपाल के अहम सेक्टर्स की कमर तोड़ दी है। राष्ट्रीय बिजली उत्पादन में 12 प्रतिशत से अधिक का योगदान देने वाले हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है। इन परियोजनाओं में काम करने वाले 900 से ज्यादा कर्मचारी फिलहाल लापता बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही देश की जीडीपी में 6.4 फीसदी का योगदान देने वाला पर्यटन, ट्रैकिंग और पर्वतारोहण उद्योग भी पूरी तरह ठप पड़ गया है।

ट्रेड रूट बंद, भारत-नेपाल सीमा पर 16 किमी लंबी कतारें

इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर भी नेपाल को गंभीर चोट पहुंची है। पासांग ल्हामु हाईवे का 40 किलोमीटर से अधिक हिस्सा बह गया है, जिससे उत्तरी रसुवा जिले का संपर्क कट गया है। चीन जाने वाला ग्यिरोंग पोर्ट ट्रेड रूट बंद होने से कारोबार पर सीधा असर पड़ा है। भारत-नेपाल सीमा पर महाराजगंज के सोनोली बॉर्डर पर मालवाहक वाहनों की 16 किलोमीटर लंबी कतारें लग गई हैं। दोनों देशों के बीच सालाना 75 से 92 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है, जिसे इस आपदा से बड़ा आर्थिक झटका लगा है। वहीं, रेड क्रॉस सोसाइटी की रिपोर्ट के अनुसार, 10,000 स्कूली बच्चे प्रभावित हुए हैं, 18 स्कूल पूरी तरह बह गए हैं और 20 की इमारतें गिर गई हैं।

सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने पर फोकस

अचानक आई इस आपदा के कारण रसुवा के 18 से ज्यादा पहाड़ी गांवों (तिमुरे, स्याफ्रुबेसी, थुमन) का बाकी देश से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। नेपाल-चीन सीमा को जोड़ने वाला रासुवागढ़ी फ्रेंडशिप ब्रिज भी बह गया है। फिलहाल भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों पर लोगों की आवाजाही के लिए अस्थायी सस्पेंशन ब्रिज बनाए जा रहे हैं। सेना लगातार हेलिकॉप्टर के जरिए लोगों को सुरक्षित निकाल रही है और प्रभावित इलाकों में जरूरी सामान पहुंचा रही है। नेपाल के अधिकारी नरेंद्र परियार और विदेश मंत्री शिशिर खनाल स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन का मुख्य फोकस अब खोज अभियान से आगे बढ़कर सुरंगों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित है।