नेपाल त्रासदी: भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, IAF के विमान स्टैंडबाय पर

नई दिल्ली/काठमांडू: नेपाल में अचानक आई भयंकर बाढ़ और जलप्रलय के बीच भारत ने अपने पड़ोसी देश की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है। संकट की इस घड़ी में राहत और बचाव कार्यों के लिए भारतीय वायु सेना (IAF) को अलर्ट कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर हालात की जानकारी ली और हर संभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 62 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 500 लोग लापता हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
वायुसेना के विमान तैयार, आज रात जाएगी राहत सामग्री
नेपाल को इस त्रासदी से उबारने के लिए भारत सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राहत और बचाव अभियानों के लिए भारतीय वायु सेना के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट बेड़े को स्टैंडबाय पर रखा गया है। इनमें वायुसेना के बड़े मालवाहक विमान C-17, C-130J और C-295 शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, बुधवार (26 अगस्त 2026) रात को ही एक C-130J ट्रांसपोर्ट विमान राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए उड़ान भर सकता है।
पीएम मोदी ने बालेन शाह से की बात, दिया मदद का भरोसा
राजनयिक स्तर पर भी भारत, नेपाल के साथ लगातार संपर्क में है। प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के पीएम बालेन शाह से बात कर इस भारी तबाही पर गहरा दुख व्यक्त किया।
बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “इस मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ खड़े हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए पूरी तरह तैयार है और दोनों देशों की टीमें बचाव व राहत कार्यों के लिए समन्वय बनाकर काम कर रही हैं।
62 मौतें, 100 से ज्यादा भारतीय अब भी लापता
भोटेकोशी नदी में आए इस उफान ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल के अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस त्रासदी में अब तक 62 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। चिंताजनक बात यह है कि करीब 500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इन लापता लोगों में 105 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (NRI) भी शामिल हैं।
हाइड्रो प्रोजेक्ट्स तबाह, तिब्बत की ओर से आई जलप्रलय
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर नदी किनारे बसी बस्तियों पर पड़ा है। पानी के तेज बहाव के कारण कम से कम एक दर्जन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (जलविद्युत परियोजनाएं) क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि यह जलप्रलय स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में अचानक आई। इससे तिब्बत सीमा से सटे रसुवा और धादिंग जिले के साथ-साथ काठमांडू के दक्षिण-पश्चिम में स्थित नुवाकोट जिले में भारी नुकसान हुआ है। शुरुआती आकलन है कि रसुवा क्षेत्र में यह बाढ़ स्थानीय बारिश के कारण नहीं, बल्कि संभवतः तिब्बत की ओर हुई भारी बारिश या हिमस्खलन के चलते आई है। हालांकि, इसका सटीक कारण अभी तलाशा जा रहा है।
गंडक बराज के सभी फाटक खुले, बिहार-यूपी में बढ़ा खतरा
नेपाल की इस तबाही का सीधा असर भारत के सीमावर्ती राज्यों पर भी पड़ रहा है। नेपाल से सटे बिहार और उत्तर प्रदेश के जिलों में प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया है।
बिहार सरकार ने गंडक नदी में जलप्रवाह अचानक बढ़ने के खतरे को देखते हुए अपने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा है। हालात से निपटने के लिए एहतियातन वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालात की गंभीरता को देखते हुए महाराजगंज और कुशीनगर में स्थानीय प्रशासन को तुरंत अलर्ट रहने और बचाव व राहत की सभी जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
