आरक्षण का आधार जाति नहीं, आर्थिक स्थिति हो: हरिश्चन्द्र सिंह

लखनऊ: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रदेश अध्यक्ष हरिश्चन्द्र सिंह ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए देश में आरक्षण नीति पर नए सिरे से विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति और वास्तविक वंचना होना चाहिए। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था की समयबद्ध समीक्षा कराने और इस पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू करने की वकालत की है।
‘सामाजिक न्याय का सम्मान, लेकिन आर्थिक कमजोरी बने पैमाना’
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सामाजिक न्याय की मूल भावना का सम्मान करते हुए एक ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे किसी भी जाति के आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को शिक्षा और रोजगार में समान अवसर मिल सकें।
जातिगत व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “गरीबी की कोई जाति नहीं होती। जब आर्थिक संकट जाति देखकर नहीं आता, तो अवसरों की व्यवस्था में केवल जाति को स्थायी आधार क्यों बनाया जाए?”
जातिगत आरक्षण की समयबद्ध समीक्षा की मांग
हरिश्चन्द्र सिंह ने मौजूदा जातिगत आरक्षण व्यवस्था की समयबद्ध समीक्षा की मांग उठाई है। उनके मुताबिक, आरक्षण का वास्तविक लाभ उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जो सच में वंचित और जरूरतमंद हैं।
उन्होंने सरकारों से सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों के आधार पर एक पारदर्शी नीति तैयार करने का आग्रह किया। उनका कहना है कि इस नई नीति में आर्थिक कमजोरी, अवसरों से वंचितता और वास्तविक सामाजिक परिस्थितियों को उचित महत्व दिया जाना चाहिए।
‘वोट बैंक नहीं, जरूरतमंद व्यक्ति केंद्र में हो’
पार्टी का स्टैंड स्पष्ट करते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि NCP किसी भी वर्ग के अधिकार छीनने के पक्ष में नहीं है। पार्टी का उद्देश्य आरक्षण व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण, पारदर्शी और समयानुकूल बनाना है।
उन्होंने कहा, “देश को ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें वोट बैंक नहीं, जरूरतमंद व्यक्ति केंद्र में हो; जाति नहीं, वास्तविक वंचना नीति का आधार बने।”
राष्ट्रीय बहस शुरू करने की अपील
हरिश्चन्द्र सिंह ने केंद्र और राज्य सरकारों से आरक्षण नीति के भविष्य, इसके प्रभाव और सीमाओं को लेकर एक व्यापक राष्ट्रीय बहस शुरू करने की मांग की है, ताकि जरूरतमंद वर्गों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
