‘इस्तीफा दे दीजिए’, केरल कांग्रेस के पोस्ट पर भड़की BJP, जानिए पूरा विवाद

cji
राघवेन्द्र मिश्रा
राघवेन्द्र मिश्रा

चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के चल रहे आंदोलन और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं के बीच केरल कांग्रेस ने एक बेहद विवादित बयान दिया है। केरल कांग्रेस ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत पर सीधा निशाना साधते हुए उनका इस्तीफा मांग लिया है।

केरल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट कर लिखा, “डियर सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था संभालना आपके बस की बात नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दें। हम आपकी जगह किसी ऐसे व्यक्ति को ले आएंगे जो इसे संभाल सके।”

BJP का तीखा पलटवार: ‘कांग्रेस चीफ जस्टिस को धमका रही है’

केरल कांग्रेस की इस पोस्ट के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक्स पर पलटवार करते हुए कांग्रेस को ‘अराजक’ करार दिया।

भंडारी ने लिखा, “अराजक कांग्रेस… यह भारत के संविधान का बड़ा अपमान है। कांग्रेस भारत के चीफ जस्टिस को धमका रही है। कांग्रेस को लगता है कि गांधी-वाड्रा परिवार संविधान से ऊपर है। कांग्रेस भारतीय लोकतंत्र और स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं से नफरत करती है।”

केरल विधानसभा में CEC को हटाने का प्रस्ताव पास

सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी और ‘INDIA’ गठबंधन के नेताओं द्वारा चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ याचिका दाखिल करने के समानांतर, केरलम (केरल) विधानसभा ने भी एक बड़ा कदम उठाया है।

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच केरल विधानसभा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करते हुए सोमवार को एक प्रस्ताव पारित किया है। माना जा रहा है कि देश की किसी विधानसभा में CEC को हटाने के लिए लाया गया यह संभवतः पहला ऐतिहासिक प्रस्ताव है।

सीएम वी.डी. सतीशन ने उठाए गंभीर सवाल

यह प्रस्ताव केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन द्वारा पेश किया गया। विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने की शिकायतें मिली हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों का स्पष्ट उल्लंघन है।

प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया है कि मतदाता सूची में संशोधन, पात्र लोगों को मतदान से वंचित करने और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार ने SIR में कथित अनियमितताओं को दूर करने और मतदाता सूची से बाहर किए गए सभी पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार तुरंत बहाल करने की मांग की है।

मुख्यमंत्री सतीशन ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “वोट का अधिकार हमारे लोकतंत्र की नींव है। किसी भी संस्था को हमारे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है… मतदान के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए। केरलम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के पक्ष में मजबूती से खड़ा है।”