होर्मुज में तेल का खेल क्यों हुआ ‘ऑल या नथिंग’? ईरान ने दिया बड़ा संदेश

ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ (Mohammad Baqer Qalibaf) ने अमेरिका और उन अन्य देशों को सख्त चेतावनी दी है जो ईरान की तेल बिक्री को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं।
मंगलवार को संसद के खुले सत्र को संबोधित करते हुए कालीबाफ ने दो टूक शब्दों में कहा, “अमेरिकियों और अन्य देशों को यह जान लेना चाहिए कि जिस भी क्षेत्र में हम तेल नहीं बेच पाएंगे, वहां कोई भी तेल नहीं बेच सकेगा। अगर हमारी सुरक्षा की गारंटी नहीं दी गई, तो कोई भी बुनियादी ढांचा सुरक्षित नहीं रहेगा।”
ट्रंप के दावों पर पलटवार और होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद
कालीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर भी निशाना साधा जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा किया था। ईरानी संसद अध्यक्ष ने इन दावों को ‘निराधार’ और ‘भ्रमित करने वाला’ करार दिया।
गौरतलब है कि ईरान ने कथित अमेरिकी-इजरायली आक्रामकता के जवाब में इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को बंद कर दिया था। पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद इसे 60 दिनों के लिए फिर से खोलने पर सहमति बनी थी, लेकिन अमेरिकी पक्ष की ओर से कथित उल्लंघनों का हवाला देते हुए ईरान ने इसे फिर से बंद कर दिया है।
जलमार्ग खोलने और बातचीत के लिए ईरान की 7 शर्तें
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने स्पष्ट किया है कि जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए ईरान ने सात पूर्व शर्तें (Prerequisites) रखी हैं। हालांकि उन्होंने सभी शर्तों का सार्वजनिक खुलासा नहीं किया, लेकिन पूर्व में दी गई जानकारी के अनुसार इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य कार्रवाई को रोकना।
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ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों (Frozen Assets) को बहाल करना।
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ईरानी जहाजों और बंदरगाहों की अवैध अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी को तत्काल समाप्त करना।
ट्रंप के ‘बड़े फैसले’ की चेतावनी पर ईरान का जवाब- ‘Bring it on’
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में डोनाल्ड ट्रंप के भाषण का जिक्र करते हुए कालीबाफ ने तीखी प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने ईरान पर ‘परमाणु हथियार’ हासिल करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वह एक ‘बड़ा फैसला’ लेने वाले हैं- या तो डील होगी या ईरान को ‘तेजी से नष्ट’ कर दिया जाएगा।
इस पर कालीबाफ ने सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा, “उनके उकसावे वाले बयानों से पता चलता है कि उन्होंने अपना व्यवहार नहीं बदला है। हमारा जवाब वही है जो पहले था- आ जाओ (Bring it on)। किसी भी आक्रामकता या दुस्साहस के खिलाफ इस्लामी गणराज्य का जवाब बेहद सख्त, दर्दनाक, सटीक और तेज होगा।”
‘ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन पीछे नहीं हटेगा’
कालीबाफ ने स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए वह किसी भी खतरे के सामने पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी घेराबंदी और दबाव का जवाब गंभीर आर्थिक योजना और सैन्य ताकत से दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian) के हालिया भाषण की भी सराहना की और कहा कि उन्होंने बाहरी दबावों के सामने ईरान के मजबूत रुख को दुनिया के सामने सही ढंग से पेश किया है।

