ईरान का RAF Fairford से कनेक्शन? संदिग्धों की रिहाई के बाद बढ़ा रहस्य

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

ब्रिटेन के ग्लूस्टरशायर स्थित रॉयल एयर फोर्स (RAF) फेयरफोर्ड बेस के पास से गिरफ्तार किए गए पांच संदिग्धों को पुलिस ने जमानत पर रिहा कर दिया है। यह वही एयरबेस है जिसका इस्तेमाल अमेरिकी सेना करती है। इन संदिग्धों की रिहाई के बाद से इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय तूल पकड़ लिया है। जहां एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन के इस फैसले पर हैरानी जताते हुए इसे गलत बताया है, वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने बिना नाम लिए इस घटना के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ होने का शक जताया है। इस बीच, ईरान ने उन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें उसे इस कथित साजिश से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी।

ब्रिटेन के आतंकवाद-रोधी पुलिस विभाग (Counter Terrorism Policing) ने बताया कि 20-25 साल के इन पांचों ब्रिटिश नागरिकों को ‘सख्त’ शर्तों के साथ जमानत दी गई है। ये सभी लंदन के रहने वाले हैं।

‘जांच अभी खत्म नहीं हुई है’

पुलिस ने रविवार को RAF फेयरफोर्ड के पास तीन संदिग्ध सफेद वैन देखे जाने की सूचना के बाद इन पांचों को गिरफ्तार किया था। इन पर ब्रिटेन के आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत विस्फोटक अपराधों और आतंकवादी हमले की तैयारी करने का शक था।

जमानत के फैसले का बचाव करते हुए आतंकवाद-रोधी पुलिस के प्रमुख, असिस्टेंट कमिश्नर लॉरेंस टेलर ने स्पष्ट किया, “इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जांच खत्म हो गई है।” उन्होंने बताया कि जांच दल हर मुमकिन पहलू से मामले को देख रहा है। पुलिस इस बात की भी गहन जांच कर रही है कि कहीं यह गतिविधि किसी विदेशी देश के इशारे पर या उनके ‘प्रॉक्सी’ (मोहरों) के जरिए तो नहीं की गई।

गिरफ्तारी के बाद सेना और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने संदिग्धों के वाहनों की सघन जांच की। हालांकि, ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैन में मिले कुछ संदिग्ध सामानों की शुरुआती जांच में वे सक्रिय विस्फोटक नहीं पाए गए। एहतियात के तौर पर पास के वेलफोर्ड गांव के करीब 85 घरों को खाली करा लिया गया था, लेकिन अगले दिन निवासियों को लौटने की इजाजत दे दी गई।

ट्रंप और रुबियो ने उठाए सवाल

ब्रिटिश पुलिस के इस फैसले पर अमेरिका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “मैं उन्हें जमानत पर छोड़े जाने के फैसले से हैरान हूं। मैं ऐसा बिल्कुल नहीं करता।” ट्रंप ने इस मामले के तार ईरान से जुड़े होने की आशंका जताई, हालांकि उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया।

वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इसे किसी विदेशी साजिश का हिस्सा बताया। रुबियो ने कहा कि इस घटना में “स्पष्ट रूप से किसी विदेशी ताकत का हाथ है,” लेकिन उन्होंने भी किसी देश का नाम नहीं लिया।

ईरान का पलटवार: ‘निराधार और दुर्भावनापूर्ण आरोप’

ईरान ने इस मामले में खुद को घसीटे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। लंदन स्थित ईरानी दूतावास ने एक बयान जारी कर उन सभी मीडिया रिपोर्ट्स और अटकलों की कड़ी निंदा की, जिनमें ईरान को इस घटना से जोड़ा गया है।

दूतावास ने कहा, “हम उन ब्रिटिश व्यक्तियों और मीडिया संगठनों द्वारा फैलाई जा रही निराधार और दुर्भावनापूर्ण अटकलों को सिरे से खारिज करते हैं, जो ईरान को RAF फेयरफोर्ड के पास हुई गिरफ्तारियों से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।”

बयान में यह भी कहा गया कि ये झूठी खबरें ब्रिटेन में ‘ईरानोफोबिया’ (ईरान के खिलाफ डर और नफरत) फैलाने का प्रोपेगेंडा हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह अपनी छवि और हितों की रक्षा के लिए कानूनी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। फिलहाल, ब्रिटिश पुलिस ने भी संदिग्धों और ईरान के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं की है।

RAF फेयरफोर्ड का रणनीतिक महत्व और तनाव

RAF फेयरफोर्ड ब्रिटेन में स्थित एकमात्र ऐसा एयरबेस है जिसका उपयोग अमेरिकी सेना भारी बमवर्षकों और अन्य विमानों के संचालन के लिए करती है। मार्च में, ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरानी मिसाइलों के खिलाफ विशिष्ट सैन्य कार्रवाई के लिए इस बेस के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। पिछले सात महीनों में अमेरिकी सेना ने इस बेस का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियानों के समर्थन में किया है।

इस बढ़ते तनाव के बीच, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने ब्रिटेन पर निशाना साधते हुए कहा था कि लंदन अपने ठिकानों को ईरान के खिलाफ इस्तेमाल करने की अनुमति देकर “ब्रिटिश नागरिकों की जान खतरे में डाल रहा है।” तेहरान पहले भी लंदन को इसके परिणाम भुगतने की चेतावनी दे चुका है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने शीर्ष अधिकारियों की एक आपातकालीन बैठक भी बुलाई है, ताकि स्थिति की पूरी समीक्षा की जा सके।