भारत में चक्रवाती तूफानों का सबसे ज्यादा खतरा किन राज्यों को है?

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Prabhash Bahadur Civil Services Mentor
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भारत की लंबी तटरेखा (coastline) इसे दुनिया के उन देशों में शामिल करती है, जो हर साल चक्रवाती तूफानों (Cyclones) के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। हाल ही में नवंबर 2026 की शुरुआत में ‘मुरासु’ नामक तूफान ने एक बार फिर तटीय इलाकों में अपनी भयावहता दिखाई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि भारत के वे कौन से राज्य हैं जिन्हें हर साल इन प्राकृतिक आपदाओं का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ता है।

पूर्वी तट पर होता है चक्रवातों का सीधा वार

भारत के पूर्वी तटीय राज्य—उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु—हमेशा से चक्रवाती तूफानों के मुख्य निशाने पर रहे हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल औसतन 2 से 4 उष्णकटिबंधीय (Tropical) चक्रवात आते हैं। चिंताजनक बात यह है कि देश को प्रभावित करने वाले लगभग 80% चक्रवात केवल बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में ही उत्पन्न होते हैं और सीधे पूर्वी तट से टकराते हैं।

  • आंध्र प्रदेश और उड़ीसा: इन दोनों राज्यों का तटीय क्षेत्र हमेशा से चक्रवातों का सामना करता रहा है। हालिया ‘मुरासु’ तूफान ने यहीं सबसे अधिक तबाही मचाई है। उड़ीसा खासतौर पर चक्रवातों और आकाशीय बिजली के प्रति बेहद संवेदनशील राज्य माना जाता है। वहीं, आंध्र प्रदेश के नेल्लोर, नरसापुर और प्रकाशम जैसे दक्षिणी तटीय जिलों को उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों (High Risk Zones) की श्रेणी में रखा गया है।

  • पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु: पश्चिम बंगाल का सुंदरबन इलाका और उत्तरी तमिलनाडु के तटीय जिले अक्सर चक्रवात के रेड अलर्ट जोन में रहते हैं, क्योंकि बंगाल की खाड़ी में उठने वाले अधिकांश तूफानों का रास्ता इन्हीं राज्यों से होकर गुजरता है।

अरब सागर और पश्चिमी तट: खतरा कम लेकिन मौजूद

बंगाल की खाड़ी की तुलना में अरब सागर (Arabian Sea) में चक्रवात कम बनते हैं, इसलिए भारत के पश्चिमी तट पर तूफानों के टकराने (Landfall) की घटनाएं अपेक्षाकृत कम होती हैं। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, हर दो से चार चक्रवातों में से अमूमन केवल एक ही तूफान पश्चिमी तट की तरफ मुड़ता है।

  • गुजरात और महाराष्ट्र: पश्चिमी तट पर सबसे अधिक खतरा गुजरात (विशेषकर कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र) और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों को रहता है। जब भी कोई तूफान इस तट के करीब आता है, तो इन राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं से तबाही देखने को मिलती है।

  • गोवा, कर्नाटक और केरल: इन राज्यों में किसी बड़े चक्रवात के सीधे टकराने की संभावना काफी कम होती है। हालांकि, यदि कोई तूफान इनके करीब से गुजरता है, तो एहतियातन अलर्ट जारी किए जाते हैं, क्योंकि इसके प्रभाव से भारी बारिश और तेज हवाओं का असर जरूर देखा जाता है।

तटीय राज्यों के साथ-साथ भीतरी इलाकों तक पहुंचता है असर

चक्रवात का कहर केवल तटीय इलाकों तक ही सीमित नहीं रहता है। समुद्र तट से टकराने के बाद तूफान भले ही अपनी ताकत खो दे, लेकिन उसका बचा हुआ हिस्सा (Remnants) तेजी से भीतरी (Landlocked) राज्यों की तरफ बढ़ता है।

तटीय क्षेत्रों से सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित राज्यों जैसे—छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक चक्रवात का असर महसूस किया जा सकता है। जब कोई कमजोर मौसमी प्रणाली (Weather System) इन राज्यों की ओर बढ़ती है, तो वहां भी अचानक भारी बारिश, तेज आंधी और जलभराव जैसे हालात बन जाते हैं, जिससे आम जनजीवन प्रभावित होता है।