इमाम मूसा सद्र की हत्या: गद्दाफी ने सीने में मारी थीं दो गोलियां!

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अजमल शाह
अजमल शाह

बेरूत/बगदाद: लेबनान के प्रमुख शिया धर्मगुरु इमाम मूसा अल-सद्र और उनके दो साथियों के दशकों पुराने रहस्यमयी ढंग से गायब होने के मामले में एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। इराकी इतिहासकार, शोधकर्ता और मीडिया हस्ती हामिद अब्दुल्ला के मुताबिक, लीबिया के तत्कालीन तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी ने अपनी विवादित किताब ‘द ग्रीन बुक’ की आलोचना किए जाने पर खुद अपनी पिस्तौल से इमाम मूसा सद्र के सीने में दो गोलियां दाग दी थीं।

अब्दुल्ला ने अपने यूट्यूब कार्यक्रम के जरिए इमाम मूसा सद्र, उनके सहयोगी शेख मोहम्मद याकूब और पत्रकार अब्बास बदरुद्दीन के लापता होने से जुड़े पूरे घटनाक्रम का विवरण साझा किया है। उनका दावा है कि यह पूरी जानकारी तत्कालीन इराकी खुफिया एजेंसी को लीबियाई सुरक्षा तंत्र से जुड़े एक उच्च पदस्थ सूत्र से मिली थी, जिसके दस्तावेज आज भी इराक में मौजूद बताए जाते हैं।

इराकी खुफिया एजेंसी तक कैसे पहुंची जानकारी?

हामिद अब्दुल्ला के अनुसार, इस पूरे मामले का सूत्रपात सलीम अल-हजानी नाम के एक पूर्व लीबियाई कर्नल से हुआ, जो बाथ पार्टी से जुड़े थे और उन्होंने बगदाद में राजनीतिक शरण मांगी थी। हजानी ने इराकी खुफिया विभाग को बताया कि लीबिया के बाह्य सुरक्षा तंत्र का एक वरिष्ठ अधिकारी मोहम्मद अहमद अल-अदल गद्दाफी शासन से जुड़े कई अहम राज जानता है।

इसके बाद ट्यूनिस स्थित इराकी दूतावास में अदल और इराकी अधिकारियों के बीच बैठक हुई, जिसके बाद अदल इराकी खुफिया एजेंसी का मुखबिर बन गया। अब्दुल्ला का दावा है कि अदल को इमाम मूसा सद्र से जुड़ी यह जानकारी गद्दाफी की एक महिला सुरक्षाकर्मी (बॉडीगार्ड) से मिली थी।

‘ग्रीन बुक’ पर विवाद और गद्दाफी का आक्रोश

इस विवाद की शुरुआत लेबनान के गृहयुद्ध के दौरान हुई, जब गद्दाफी शासन लेबनान के कई संगठनों सहित इमाम सद्र के ‘अमल मूवमेंट’ को वित्तीय मदद दे रहा था। उसी दौरान गद्दाफी अपनी ‘ग्रीन बुक’ का प्रचार-प्रसार कर रहा था। इमाम सद्र ने जब यह किताब पढ़ी, तो एक निजी बातचीत में उन्होंने इसे “बेतुका” बताया और इसके लेखक को “पागल” करार दिया। हालांकि, अमल मूवमेंट में मौजूद लीबियाई जासूसों ने उनकी बातचीत रिकॉर्ड कर गद्दाफी तक पहुंचा दी।

25 अगस्त 1978 को इमाम मूसा सद्र लीबिया सरकार के आधिकारिक निमंत्रण पर त्रिपोली पहुंचे थे। अब्दुल्ला के अनुसार, 31 अगस्त को गद्दाफी ने अपने बाब अल-अजीजिया परिसर में सद्र के साथ बिना उनके दोनों सहयोगियों के एक गोपनीय बैठक बुलाई। बैठक में गद्दाफी ने सीधे पूछा कि क्या उन्होंने वाकई ग्रीन बुक को बेतुका कहा था। सद्र ने बिना झिझके स्पष्ट किया कि इस किताब में कोई मूल्यवान विचार या सिद्धांत नहीं है।

इस पर गद्दाफी आगबबूला हो गया और उसने इमाम सद्र की पगड़ी जमीन पर फेंकते हुए उन्हें ‘इजराइली एजेंट’ कह दिया। जवाब में सद्र ने शांत रहते हुए कहा कि गद्दाफी का अंत जहन्नुम (नरक) में होगा।

गोलीबारी और शवों को ठिकाने लगाने का दावा

विवरण के मुताबिक, गुस्से में गद्दाफी ने सुरक्षाकर्मियों को इमाम सद्र को पकड़कर ले जाने का आदेश दिया। इसके बाद गद्दाफी खुद उनके पीछे गया, होस्नी अल-अहरारी नामक व्यक्ति को बुलाया और अपनी पिस्तौल निकालकर इमाम सद्र के सीने में दो गोलियां मार दीं। इसके बाद उसने वह पिस्तौल अहरारी को सौंप दी और बंधक बनाए गए शेख मोहम्मद याकूब और अब्बास बदरुद्दीन को भी खत्म करने का आदेश दिया।

अब्दुल्ला का दावा है कि घटना के बाद अहरारी को तीनों शवों को ले जाकर पश्चिमी लीबिया के ‘बीर अल-गनम’ इलाके में दफनाने के निर्देश दिए गए थे।

हन्नीबल गद्दाफी की जमानत पर परिवार का विरोध

इमाम मूसा सद्र से जुड़े इस घटनाक्रम के बीच उनके परिवार ने लेबनान की एक अदालत द्वारा मुअम्मर गद्दाफी के बेटे हन्नीबल गद्दाफी को 11 मिलियन डॉलर (करीब 1.1 करोड़ डॉलर) की जमानत पर रिहा करने के फैसले का कड़ा विरोध जताया है। हन्नीबल गद्दाफी लंबे समय से इस मामले की जांच के सिलसिले में लेबनान की हिरासत में हैं।