IGKV Paper Leak: परीक्षा से पहले वायरल हुआ एंटोमोलॉजी का कथित पेपर

IGKV Paper Leak
शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

रायपुर: छत्तीसगढ़ की इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में बीएससी एग्रीकल्चर सेकेंड ईयर की एंटोमोलॉजी परीक्षा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। छात्रों ने दावा किया कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही कथित प्रश्नपत्र सोशल मीडिया और व्हॉट्सऐप ग्रुप्स में वायरल हो गया था। मामले की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षा रद्द कर दी। अब यह पता लगाने के लिए जांच समिति बनाई गई है कि वायरल हुआ प्रश्नपत्र वास्तव में लीक हुआ था या सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री महज एक फर्जी या AI से तैयार किया गया दस्तावेज था।

परीक्षा से पहले वायरल हुआ कथित प्रश्नपत्र

मामला 20 अगस्त 2026 का है। बीएससी कृषि सेकेंड ईयर के एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा सुबह 10 बजे होनी थी। छात्रों का दावा है कि इससे पहले ही कथित प्रश्नपत्र व्हॉट्सऐप और सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा था।

कुछ छात्रों के मुताबिक सुबह करीब 8:45 बजे कथित प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर साझा किया गया। इसी बीच विश्वविद्यालय को करीब 8:54 बजे एक ईमेल मिला, जिसमें परीक्षा का पेपर लीक होने का दावा किया गया था।

हालांकि शुरुआती स्तर पर ईमेल के साथ कोई प्रश्नपत्र संलग्न नहीं था। इसलिए उस समय विश्वविद्यालय प्रशासन के पास पेपर लीक होने की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं था।

परीक्षा शुरू हुई, फिर छात्रों ने दिखाई वायरल सामग्री

विश्वविद्यालय के मुताबिक परीक्षा निर्धारित समय पर शुरू कराई गई और प्रश्नपत्र सुबह करीब 9:30 बजे परीक्षा केंद्रों पर खोला गया। इसके बाद छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रशासन के पास पहुंचा और व्हॉट्सऐप पर वायरल हो रही सामग्री के बारे में जानकारी दी।

विश्वविद्यालय अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री पूरी तरह मूल प्रश्नपत्र जैसी नहीं थी, लेकिन उसमें कई सवाल वास्तविक प्रश्नपत्र से मिलते-जुलते पाए गए।

यही बात विवाद का सबसे अहम हिस्सा बन गई। प्रशासन ने छात्रों के हित को देखते हुए एहतियाती कदम उठाया और परीक्षा रद्द करने का फैसला किया।

अब एंटोमोलॉजी की यह परीक्षा सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में दोबारा आयोजित की जाएगी।

असली पेपर लीक हुआ या AI से बनी फर्जी सामग्री?

अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वायरल सामग्री की वास्तविकता क्या थी।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कपिल देव दीपक के मुताबिक मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई है। समिति यह पता लगाएगी कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री कहां से आई, उसका वास्तविक प्रश्नपत्र से कितना संबंध है और क्या परीक्षा से पहले किसी स्तर पर प्रश्नपत्र लीक हुआ था।

प्रशासन इस एंगल से भी जांच कर रहा है कि कहीं वायरल सामग्री AI की मदद से तैयार तो नहीं की गई थी।

इसके अलावा सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की जांच के लिए पुलिस की साइबर और सोशल मीडिया इकाइयों की मदद ली जाएगी।

सिर्फ वायरल पेपर नहीं, सवालों का मिलना बना वजह

विवाद इसलिए गंभीर हुआ क्योंकि सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री और वास्तविक परीक्षा के प्रश्नपत्र में कुछ सवालों की समानता पाई गई। इसी आधार पर प्रशासन ने परीक्षा को लेकर निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उसे रद्द करना उचित समझा।

मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार के संज्ञान में पूरा मामला है और विश्वविद्यालय ने परीक्षा रद्द कर जांच शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।

कांग्रेस ने परीक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

मामले को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार और विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कथित पेपर लीक को छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस का सवाल है कि अगर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र या उससे मिलती-जुलती सामग्री बाहर पहुंची थी, तो वह विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था के दायरे से बाहर कैसे पहुंची।