Nepal से शव भारत कैसे लाएं? पहचान से दूतावास तक जानिए पूरी प्रक्रिया

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अजमल शाह
अजमल शाह

नेपाल इस वक्त भीषण बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी से जूझ रहा है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच कई भारतीय नागरिकों के भी वहां फंसे होने या हताहत होने की खबरें हैं। ऐसे संकटपूर्ण हालात में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि नेपाल में किसी भारतीय नागरिक की दुखद मृत्यु हो जाती है, तो उनके शव को वापस स्वदेश (भारत) कैसे लाया जाता है?

शव को दूसरे देश से वापस लाना एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें स्थानीय प्रशासन, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास और मृतक के परिवार के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता होती है। दुर्घटना, बाढ़ या प्राकृतिक आपदा के मामलों में यह प्रक्रिया और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। आइए जानते हैं क्या हैं इसके नियम और पूरी प्रक्रिया:

1. मृतक की पहचान की प्रक्रिया

शव वापसी की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम मृतक की शिनाख्त करना है:

  • तस्वीर और विवरण: आपदा के समय नेपाल पुलिस द्वारा जारी की गई तस्वीरों और शारीरिक विवरण के आधार पर परिवार पहचान कर सकता है।

  • डीएनए (DNA) मैचिंग: यदि शव क्षत-विक्षत हो या तस्वीर से पहचान संभव न हो, तो अधिकारी अज्ञात शवों का डीएनए प्रोफाइल तैयार करते हैं। परिवार के करीबी सदस्य (माता-पिता, बच्चे) अपना सैंपल दे सकते हैं, जिससे वैज्ञानिक तरीके से शिनाख्त की जाती है। पहचान पुख्ता होने के बाद भारतीय दूतावास नेपाल सरकार के साथ आगे की औपचारिकताएं पूरी करता है।

2. शव लाने के लिए जरूरी दस्तावेज

शव को सड़क या हवाई मार्ग से भारत लाने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों का होना अनिवार्य है:

  • अस्पताल या स्थानीय अधिकारी द्वारा जारी किया गया मूल डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाण पत्र)

  • दुर्घटना या आपदा के मामले में पुलिस रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट

  • इम्बामिंग सर्टिफिकेट (Embalming Certificate): यह प्रमाणित करता है कि शव को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी रसायनों का लेप (संरक्षण प्रक्रिया) किया गया है।

  • हेल्थ सर्टिफिकेट: यह सुनिश्चित करने के लिए कि शव से किसी प्रकार का संक्रमण फैलने का खतरा नहीं है।

  • मृतक का पासपोर्ट या नागरिकता से जुड़ा अन्य पहचान पत्र, जिसे रद्द करने और सरकारी रिकॉर्ड के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

3. भारतीय दूतावास की एनओसी (NOC) नेपाल से भारत तक शव ले जाने के लिए परिवार को काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से अनापत्ति प्रमाण पत्र (No Objection Certificate – NOC) लेना अनिवार्य होता है। दूतावास नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय कर शव वापसी की प्रक्रिया को सुगम बनाने में मदद करता है।

4. सड़क और हवाई मार्ग के नियम

  • सड़क मार्ग: भारत और नेपाल की सीमा खुली है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बिना कागजी कार्यवाही के शव लाया जा सकता है। पुलिस, मेडिकल और दूतावास से जुड़े सभी कागजात पूरे होने के बाद ही सड़क मार्ग से सीमा पार करने की अनुमति मिलती है।

  • हवाई मार्ग: यदि शव को फ्लाइट से लाना है, तो अतिरिक्त औपचारिकताएं होती हैं। शव को पूरी तरह से सील किए गए ताबूत (Coffin) में रखना होता है। इसके लिए एयरलाइन के साथ पहले से समन्वय करना जरूरी है, क्योंकि शव को ‘खास कार्गो’ के तौर पर ले जाया जाता है।

आपदा के मामलों में अतिरिक्त चुनौतियां

बाढ़ या भूस्खलन जैसी आपदाओं में यह प्रक्रिया लंबी हो सकती है। बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने और बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण शिनाख्त में देरी होती है। ऐसी विशेष परिस्थितियों में, पहचान प्रक्रिया पूरी होने तक नेपाली अधिकारी शवों को सुरक्षित रखने या अस्थायी रूप से दफनाने का भी निर्णय ले सकते हैं।