जिन पर रखी जा रही थी नजर, क्या वही संभालेंगे जर्मनी की सुरक्षा फाइलें?

जर्मनी के पूर्वी राज्य सेक्सनी-एन्हाल्ट (Saxony-Anhalt) में धुर-दक्षिणपंथी पार्टी ‘अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी’ (AfD) की ऐतिहासिक चुनावी जीत के बाद देश और उसके पश्चिमी सहयोगियों के सामने एक अप्रत्याशित सुरक्षा चुनौती खड़ी हो गई है। 1945 के बाद पहली बार किसी राज्य में सत्ता की दहलीज पर पहुंची इस पार्टी को लेकर सुरक्षा एजेंसियों में भारी चिंता है। आशंका जताई जा रही है कि सरकार गठन के बाद यह दल राज्य के गृह मंत्रालय के जरिए उन खुफिया और पुलिस तंत्र की कमान संभाल सकता है, जो अब तक खुद उसी पर नजर रख रहे थे।
खुफिया एजेंसी BfV और अंडरकवर एजेंटों की पहचान का खतरा
जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी, फेडरल ऑफिस फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन (BfV), दक्षिणपंथी चरमपंथियों को देश के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा मानती रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर AfD को कानूनी प्रक्रिया के तहत ‘संदिग्ध चरमपंथी’ समूह माना गया है, लेकिन सेक्सनी-एन्हाल्ट में पार्टी की प्रांतीय इकाई ‘पुष्ट चरमपंथी’ (Confirmed Extremist) श्रेणी में दर्ज है। इस वजह से संघीय और राज्य खुफिया एजेंसियां पार्टी के अंदर अंडरकवर एजेंटों और सूत्रों के जरिए निगरानी रखती रही हैं।
जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के सीनियर रिसर्च फेलो जैकब रॉस के मुताबिक, यदि AfD राज्य में पुलिस और खुफिया तंत्र का जिम्मा संभालने वाले गृह मंत्रालय का प्रभार हासिल कर लेती है, तो उसे अपनी ही निगरानी से जुड़ी गुप्त फाइलों तक सीधी पहुंच मिल जाएगी। खुफिया समुदाय में सबसे बड़ा डर यह है कि पार्टी सबसे पहले अपने ही संगठन में मौजूद सरकारी जासूसों और मुखबिरों की पहचान करने की कोशिश करेगी।
रूस और पुतिन से नजदीकियों पर NATO सहयोगियों की चिंता
जर्मनी और उसके पश्चिमी सहयोगियों के लिए दूसरी बड़ी चिंता यह है कि जर्मन, यूरोपीय और नाटो (NATO) सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े गोपनीय दस्तावेज रूस के हाथों में पड़ सकते हैं।
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इस पार्टी के साथ गोपनीय सूचनाएं साझा करने का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि इसके रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ संबंध किसी से छिपे नहीं हैं। इससे पहले जर्मन संसद (बुंडेस्टाग) में चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के सत्तारूढ़ गठबंधन ने आरोप लगाया था कि AfD जर्मनी के क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की संवेदनशील जानकारियां जुटाने में रुचि दिखा रही है।
सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक इंटीग्रिटी के निदेशक एंटोन शेखोवत्सोव का मानना है कि यूरोपीय संघ में AfD अब सबसे बड़ी और मजबूत प्रो-रूसी पार्टी बन चुकी है, जिसके रूस के साथ गहरे संबंध रहे हैं।
फ्रांस की चेतावनी और बर्लिन का ‘सीक्रेट वॉर प्लान’
फ्रांसीसी खोजी पत्रिका ‘कैनार्ड एंचेने’ के अनुसार, फ्रांस की घरेलू खुफिया एजेंसी ने जर्मन एजेंसी को पहले ही सूचित कर दिया है कि यदि सेक्सनी-एन्हाल्ट में AfD की सरकार बनती है, तो वह रूस और दक्षिणपंथी चरमपंथ से जुड़ी संवेदनशील खुफिया जानकारी साझा करना बंद कर देगी।
‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की संघीय सरकार ने यूरोपीय सहयोगियों की चिंताओं को देखते हुए AfD-नीत संभावित राज्य सरकार की खुफिया फाइलों तक पहुंच रोकने का प्लान तैयार किया है।
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इसके तहत 2024 में तैयार 1,000 पन्नों के उस अति-गोपनीय ‘वॉर प्लान’ तक AfD नेताओं की पहुंच रोकी जाएगी, जिसमें यूक्रेन जैसे रूसी हमले की स्थिति में जर्मनी और नाटो की सुरक्षा रणनीति दर्ज है।
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रूसी जासूसी और चरमपंथियों पर चल रही जांच से जुड़ी जानकारियों को भी इस दायरे से बाहर रखने की तैयारी है।
ऑस्ट्रिया की पुरानी मिसाल और AfD की कानूनी आपत्ति
यूरोप में किसी दक्षिणपंथी दल के सत्ता में आने पर खुफिया जानकारी रोकने की यह पहली घटना नहीं है। 2017 में जब ऑस्ट्रिया की धुर-दक्षिणपंथी ‘फ्रीडम पार्टी’ गठबंधन सरकार में शामिल हुई और उसे गृह मंत्रालय मिला था, तब भी यूरोपीय सहयोगियों ने खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान पर पाबंदियां लगा दी थीं।
दूसरी तरफ, खुफिया सूचनाएं रोके जाने के कदमों पर AfD ने तीखा विरोध जताया है और इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही है। AfD के प्रवक्ता जोर्क हरमन ने कहा कि बिना किसी ठोस आधार और अप्रमाणित आरोपों के आधार पर पार्टी से खुफिया जानकारी छिपाना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है और यह जनादेश का अपमान होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि जर्मनी में राज्यों की पुलिस पर स्थानीय सरकारों का नियंत्रण होता है, ऐसे में किसी संकट की स्थिति में किसी राज्य सरकार को पूरी तरह अंधेरे में रखना देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे के लिए भी बड़ी व्यावहारिक चुनौतियां पैदा कर सकता है।

