Don’t Be Shy Review: नए चेहरों की रोम-कॉम ने कितना किया इम्प्रेस?

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट के प्रोडक्शन हाउस ‘इटर्नल सनशाइन प्रोडक्शंस’ के बैनर तले बनी नई रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म ‘डोंट बी शाय’ (Don’t Be Shy) अमेजन प्राइम वीडियो पर सीधे रिलीज कर दी गई है। श्रीति मुखर्जी के निर्देशन में बनी इस फिल्म के जरिए बॉलीवुड को चार नए चेहरे मिले हैं। 1990 के दशक के आखिर और 2000 की शुरुआत के कॉलेज कैंपस पर आधारित यह फिल्म हॉलीवुड के टीन-ड्रामा जैसा बाहरी आवरण रखती है, लेकिन इसकी आत्मा पूरी तरह देसी है।

महत्वाकांक्षा और मिडिल क्लास से चिढ़ती ‘शाय’ की कहानी

फिल्म की कहानी श्यामिली दास उर्फ ‘शाय’ (आरुषि बजाज) के इर्द-गिर्द बुनी गई है। शाय एक ऐसी लड़की है जिसे अपनी मिडिल-क्लास जिंदगी और अपने सीधे-सादे माता-पिता से चिढ़ है। उसे लगता है कि उसकी खूबसूरती उसे खास फायदे दिला सकती है। उसका पूरा भविष्य उसके अमीर बॉयफ्रेंड मयंक (पीयूष खाती) के इर्द-गिर्द टिका होता है, जो उसे एक बेहतर जिंदगी देने वाला है। कहानी में मोड़ तब आता है जब मयंक उसे अचानक छोड़ देता है और शाय को अपनी जिंदगी को नए सिरे से समझना पड़ता है।

फिल्म का टाइटल ‘डोंट बी शाय’ एक स्मार्ट प्ले है, जिसका सीधा मतलब है कि आपको इस किरदार ‘शाय’ जैसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। वह बिगड़ी हुई है, अपने फायदे के लिए झूठ बोलती है और मानती है कि महिलाओं का इकलौता काम हॉट दिखना है।

हॉलीवुड फॉर्मूले में देसी तड़का और स्क्रीनप्ले

श्रीति मुखर्जी ने इस फिल्म को अमेरिकी हाई स्कूल म्यूजिकल फिल्मों के अंदाज में पेश किया है। आमतौर पर अंडरडॉग कहानियों में मुख्य किरदार से सहानुभूति जुड़ जाती है, लेकिन यहां ऐसा नहीं होता। इसके बजाय, उसके अमीर लेकिन अच्छे दोस्त, उसकी कट्टर दुश्मन और फेमिनिस्ट तारा (बियांका अरोड़ा) और उसके माता-पिता आपका ध्यान खींचते हैं।

करीब ढाई घंटे की लंबाई के कारण फिल्म बीच-बीच में बोझिल महसूस होती है। बार-बार मौके मिलने के बावजूद शाय का अपने करीबियों को निराश करना एक पॉइंट के बाद थोड़ा थकाऊ लगने लगता है। इसके बावजूद, नए टैलेंट की फ्रेशनेस फिल्म को पटरी से उतरने नहीं देती। यह तब ज्यादा बेहतर लगती है जब यह उधार ली गई चमक-धमक को छोड़कर अपने देसी इमोशंस पर लौटती है।

एक्टिंग में छा गए अनुराग बसु और नए चेहरे

पर्दे के पीछे कमाल दिखाने वाले फिल्म डायरेक्टर अनुराग बसु ने यहां कैमरे के सामने बेहतरीन काम किया है। खाने-पीने के शौकीन शाय के पिता के रूप में वे स्क्रीन पर बेहद स्वाभाविक और प्यारे लगे हैं। उनके साथ कुणाल रॉय कपूर और अंजू अल्वा नाइक ने भी सपोर्टिंग रोल में अच्छी मौजूदगी दर्ज कराई है।

नए कलाकारों की बात करें तो बेफिक्र दोस्त ‘ध्रुव’ के रोल में अंश दुग्गल और कन्फ्यूज्ड ‘मयंक’ के किरदार में पीयूष खाती ने अपनी छाप छोड़ी है। मुख्य भूमिका निभा रहीं आरुषि बजाज ने ‘शाय’ के नखरों, उसके बाहरी बिगड़ैलपन और भीतर छिपी असुरक्षा को पर्दे पर खूबसूरती से उतारा है।

यह फिल्म असल में 2000 के दशक की हॉलीवुड रोमांटिक-कॉमेडी फिल्मों को एक ट्रिब्यूट है। अच्छे लोगों, सहेलियों की दोस्ती, समोसे के लिए प्यार और माता-पिता व बच्चे के बीच का रिश्ता इसके हल्के-फुल्के रोमांस को जरूरी इमोशनल गहराई देता है।