Argentina Poverty Rate: 6 महीने में 4.1% बढ़ी गरीबी, क्या बदला?

दक्षिण अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अर्जेंटीना में एक बार फिर गरीबी में तेज उछाल दर्ज किया गया है। आधिकारिक सांख्यिकी एजेंसी ‘इंडेक’ (Indec) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली छमाही में देश की गरीबी दर बढ़कर 32.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह 2025 की दूसरी छमाही (28.2%) की तुलना में 4.1 प्रतिशत अंक अधिक है।
बढ़ती महंगाई के मुकाबले आमदनी में सुधार न होने के कारण यह स्थिति बनी है, जिसने ‘फ्री-मार्केट’ समर्थक राष्ट्रपति जेवियर मिलेई (Javier Milei) द्वारा पिछले दो वर्षों में हासिल की गई आर्थिक बढ़त पर असर डाला है।
चरम गरीबी और बच्चों पर सबसे बुरा असर
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, केवल सामान्य गरीबी ही नहीं, बल्कि ‘अत्यधिक गरीबी’ (Extreme Poverty) में भी इजाफा हुआ है:
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देश में अत्यधिक गरीबी की दर 6.3 प्रतिशत से बढ़कर 7.5 प्रतिशत हो गई है।
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इस आर्थिक संकट का सबसे गहरा असर बच्चों पर पड़ा है। देश में 14 वर्ष और उससे कम उम्र के 44.5 प्रतिशत बच्चे गरीब श्रेणी में आते हैं, जबकि 10.8 प्रतिशत बच्चे अत्यधिक गरीबी का सामना कर रहे हैं।
इंडेक के मानकों के अनुसार, जो वयस्क लगभग 340 डॉलर (करीब 28,000 रुपये) मूल्य की बुनियादी वस्तुओं और सेवाओं की टोकरी खरीदने में असमर्थ हैं, उन्हें गरीब माना जाता है। वहीं, लगभग 150 डॉलर मूल्य की केवल भोजन सामग्री वाली बुनियादी खाद्य टोकरी न खरीद पाने वालों को अत्यधिक गरीब की श्रेणी में रखा गया है।
महंगाई, बेरोजगारी और कंपनियों के बंद होने से संकट
मिलेई के सत्ता संभालने के बाद से अर्जेंटीना में गरीबी के आंकड़ों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। राष्ट्रपति बनने के तुरंत बाद पेसो (स्थानीय मुद्रा) के 50 प्रतिशत से अधिक अवमूल्यन के कारण 2024 की पहली छमाही में गरीबी रिकॉर्ड 52.9 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। इसके बाद कड़े मितव्ययिता उपायों और महंगाई में कमी के चलते यह 2025 के अंत तक घटकर 28.2 प्रतिशत पर आ गई थी, लेकिन 2026 की शुरुआत में महंगाई में फिर उछाल आने से यह दोबारा बढ़ गई।
इस संकट के पीछे कई अहम कारक सामने आए हैं:
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बेरोजगारी में वृद्धि: वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में बेरोजगारी दर बढ़कर 7.9 प्रतिशत हो गई, जो 2021 के बाद का उच्चतम स्तर है।
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उद्योगों पर मार: विदेशी प्रतिस्पर्धा और आयात की खुली छूट के कारण विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और खुदरा क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है। मिलेई के पद संभालने के बाद से अब तक करीब 30,000 कंपनियां बंद हो चुकी हैं।
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अनौपचारिक रोजगार (Informal Work): कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ अर्जेंटीना (UCA) के शोधकर्ता एडुआर्डो डोनजा का कहना है कि समस्या केवल बेरोजगारी नहीं, बल्कि असुरक्षित और अनौपचारिक कामकाज है। आय न होने पर लोग कचरा बीनने, स्ट्रीट वेंडिंग और स्टेशनों पर खाद्य सामग्री बेचने जैसे काम करने को मजबूर हैं।
राष्ट्रपति जेवियर मिलेई का दावा रहा है कि उन्होंने 2024 के शीर्ष स्तर से गरीबी दर घटाकर करीब 1.4 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला था, लेकिन ताजा आंकड़ों ने उनके कठोर मितव्ययिता और गैर-विनियमन (Deregulation) मॉडल पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं।

