संगठन, सरकार और सहयोगी… BJP का ट्रिपल ‘S’ फॉर्मूला क्या है?

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी से अपनी रणनीतिक तैयारियों को रफ्तार दे दी है। राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही बीजेपी अब अपने खास ‘ट्रिपल S’ (Triple ‘S’) फॉर्मूले पर काम कर रही है। इस फॉर्मूले के केंद्र में ‘S’ फैक्टर यानी— संगठन (Sangathan), सरकार (Sarkar) और सहयोगी (Sahyogi) हैं।

क्या है BJP का ट्रिपल ‘S’ फॉर्मूला?

बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि केवल संगठन की सक्रियता से ही 2027 का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है:

  1. संगठन: जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और संगठन के ढांचे को मजबूत करना।

  2. सरकार: राज्य और केंद्र सरकार की जनहितैषी योजनाओं, कामकाज और उपलब्धियों को सीधे जनता तक पहुंचाना।

  3. सहयोगी: एनडीए (NDA) के सहयोगी दलों के साथ आपसी मतभेद दूर कर मजबूत तालमेल और एकजुटता का संदेश देना।

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के यूपी दौरों में भी इसी रणनीति की झलक देखने को मिली है।

अमित शाह ने कार्यकर्ताओं में भरा जोश

हाल ही में लखनऊ में आयोजित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को पार्टी का ‘असली मालिक’ बताते हुए उनमें नया जोश भरा। उन्होंने प्रदेश की बीजेपी सरकार की तुलना ‘अंगद के पैर’ से करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का स्पष्ट संदेश दिया।

संगठनात्मक क्षेत्रों में पदयात्राएं और समीक्षा

कार्यसमिति की बैठक के बाद, बीजेपी ने चुनावी माहौल बनाने के लिए प्रदेश के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों में ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ पदयात्राएं निकालीं।

इसके साथ ही, चुनावी तैयारियों की जमीनी हकीकत परखने के लिए पार्टी आलाकमान लगातार समीक्षा कर रहा है। इसकी शुरुआत पश्चिम क्षेत्र से हुई, जिसके बाद काशी क्षेत्र की समीक्षा की गई। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर के दो दिवसीय दौरे के दौरान पार्टी की कोर कमेटी के साथ बैठक कर संगठन की स्थिति पर गहन मंथन किया गया।

सहयोगियों के साथ मजबूत गठजोड़ पर जोर

बीजेपी की ‘ट्रिपल S’ रणनीति का तीसरा और अहम हिस्सा सहयोगी दल हैं। पार्टी पूरब से लेकर पश्चिम तक अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ एकजुटता दिखाने की पूरी कोशिश कर रही है। हाल ही में आयोजित पदयात्राओं में सहयोगी दलों की सक्रिय भागीदारी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। पार्टी की मंशा है कि चुनाव से पहले किसी भी तरह की गुटबाजी या मतभेद को खत्म कर ‘मिशन-2027’ के लिए एक मजबूत और अभेद्य राजनीतिक जमीन तैयार की जाए।