मोबाइल और स्क्रीन के बीच छूट रहा खेलकूद, सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर

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राघवेन्द्र मिश्रा
राघवेन्द्र मिश्रा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक नई रिपोर्ट में किशोरों (टीनएजर्स) की सेहत को लेकर चिंताजनक खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में 11 से 17 साल की उम्र का हर चौथा किशोर हफ्ते में एक घंटे भी शारीरिक गतिविधि (फिजिकल एक्टिविटी) नहीं करता है। WHO ने चेतावनी दी है कि युवाओं की यह निष्क्रियता गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को काफी हद तक बढ़ा रही है।

‘द लांसेट ग्लोबल हेल्थ’ में प्रकाशित इस अध्ययन में 140 देशों के 32 लाख से ज्यादा किशोरों का डेटा शामिल किया गया है।

15 सालों में नहीं हुआ कोई सुधार

संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी के अनुमान के मुताबिक, अगर इन आंकड़ों को वैश्विक स्तर पर देखें, तो दुनिया के करीब 24 करोड़ युवा ऐसे हैं जो पूरे हफ्ते में एक भी दिन शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहते। औसतन एक किशोर हफ्ते में सिर्फ 2.7 दिन ही एक्टिव रहता है, जबकि सातों दिन फिजिकल एक्टिविटी करने वालों की संख्या महज 14 प्रतिशत है।

WHO प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा, “पिछले 15 वर्षों में दुनिया ने युवाओं को शारीरिक रूप से सक्रिय करने के मामले में लगभग कोई प्रगति नहीं की है, और लड़कियां इसमें सबसे ज्यादा पीछे छूट रही हैं।”

जेंडर गैप: लड़कों से काफी पीछे हैं लड़कियां

अध्ययन में किशोरों के बीच एक बड़ा ‘जेंडर गैप’ भी सामने आया है। लगभग हर देश और क्षेत्र में लड़कियां, लड़कों की तुलना में शारीरिक गतिविधियों में कम हिस्सा ले रही हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, 28 प्रतिशत लड़कियों ने पिछले एक हफ्ते में एक भी दिन कोई फिजिकल एक्टिविटी नहीं की, जबकि लड़कों में यह आंकड़ा 22 प्रतिशत रहा। वहीं, हर दिन शारीरिक रूप से सक्रिय रहने वालों में लड़कियां केवल 11 प्रतिशत और लड़के 17 प्रतिशत हैं।

देशों के बीच बड़ा अंतर

रिपोर्ट बताती है कि अलग-अलग देशों के युवाओं की आदतों में भारी भौगोलिक अंतर है। नेपाल, नामीबिया और फिलीपींस जैसे देशों में 40 प्रतिशत किशोर शारीरिक रूप से पूरी तरह निष्क्रिय (जीरो एक्टिव डेज) पाए गए। दूसरी ओर, बांग्लादेश और सर्बिया में 30 प्रतिशत से अधिक युवा हर दिन व्यायाम या शारीरिक गतिविधि करते हैं।

बीमारियों का खतरा और समाधान

WHO ने स्पष्ट किया है कि फिजिकल एक्टिविटी की कमी सीधे तौर पर हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और कुछ प्रकार के कैंसर का एक प्रमुख जोखिम कारक (रिस्क फैक्टर) है। वर्तमान में युवाओं की लाइफस्टाइल तेजी से स्क्रीन के इर्द-गिर्द सिमट गई है।

संगठन के प्रमुख टेड्रोस के मुताबिक, इसका समाधान किशोरों को सिर्फ ज्यादा मेहनत करने की सलाह देना नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे स्कूल, सड़कें और समुदाय बनाने होंगे जहां खेलना, चलना और सक्रिय रहना सुरक्षित और आसान हो। WHO ने देशों से ऐसी नीतियां बनाने का आग्रह किया है जो सुरक्षित परिवहन और फिजिकल एक्टिविटी को रोजमर्रा की जिंदगी का एक सुलभ हिस्सा बना सकें।