दिवाली से पहले वेटिकन की अपील, हिंदू-ईसाई बढ़ाएं शांति और भाईचारा

हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहार दिवाली (Deepavali) से पहले वेटिकन (Vatican) ने दुनिया भर के हिंदू समुदाय को शुभकामनाएं दी हैं। वेटिकन के ‘अंतरधार्मिक संवाद विभाग’ (Dicastery for Interreligious Dialogue) ने 8 नवंबर को मनाए जाने वाले इस पर्व पर एक खास संदेश जारी किया है। वेटिकन ने हिंदुओं और ईसाइयों से अपील की है कि वे विभिन्न धर्मों के बीच शांति, सम्मान और समझ को बढ़ावा देने के लिए एक साथ आएं।
‘असीसी की भावना: शांति के नए रास्ते’
“हिंदू और ईसाई: असीसी की भावना में एक साथ शांति के मार्ग प्रशस्त करना” शीर्षक वाले इस संदेश में दोनों समुदायों को प्रार्थना, करुणा और संवाद के माध्यम से मजबूत संबंध बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब वेटिकन धार्मिक नेताओं की उस ऐतिहासिक सभा के 40 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है, जो विश्व शांति की प्रार्थना के लिए एक साथ आए थे।
विभाग ने अपनी शुभकामनाओं में कहा, “ईश्वर, जो सभी अच्छाइयों का स्रोत है, आपको, आपके परिवारों, प्रियजनों और समुदायों को अपार आनंद, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद दे।”
ऐतिहासिक बैठक की याद और ‘शांति का संदेश’
वेटिकन के संदेश में 27 अक्टूबर 1986 की उस ऐतिहासिक घटना को याद किया गया है, जब पोप जॉन पॉल द्वितीय के निमंत्रण पर इटली के असीसी में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि शांति की प्रार्थना के लिए एकत्र हुए थे। शांति और भाईचारे का संदेश देने वाले संत फ्रांसिस के गृहनगर असीसी में हुई इस सभा का उद्देश्य वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना और विश्व शांति को बढ़ावा देना था। पोप जॉन पॉल द्वितीय ने इसी दृष्टिकोण को ‘असीसी की भावना’ (Spirit of Assisi) का नाम दिया था।
वेटिकन ने जोर देकर कहा कि आज के समय में, जब युद्ध, संघर्ष और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए धर्म का इस्तेमाल बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं, हिंदू और ईसाई समुदायों को यह विचार करना चाहिए कि वे मिलकर कैसे काम कर सकते हैं।
मजबूत रिश्ते के लिए वेटिकन के 3 सुझाव
वेटिकन ने दोनों समुदायों के बीच रिश्ते मजबूत करने और शांति में योगदान देने के तीन तरीके बताए हैं:
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प्रार्थना (Prayer): अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए दूसरों की मान्यताओं का सम्मान करना।
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भाईचारा (Fraternity): धार्मिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना सभी के साथ दया, सम्मान और गरिमा से पेश आना।
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अंतरधार्मिक संवाद (Interfaith Dialogue): वेटिकन ने विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच संवाद को “अत्यावश्यक” बताया है।
संदेश में स्पष्ट किया गया है कि धर्म का उपयोग कभी भी हिंसा को सही ठहराने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। पोप बेनेडिक्ट सोलहवें का हवाला देते हुए इसमें कहा गया है कि “हिंसा धर्म के बिल्कुल विपरीत है और यह इसके विनाश का कारण बनती है।”
दिवाली: असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक
वेटिकन ने दिवाली के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘दीपों की पंक्ति’ का यह त्योहार असत्य पर सत्य, अंधकार पर प्रकाश, मृत्यु पर जीवन और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह त्योहार परिवारों को एक साथ लाता है और नई शुरुआत, मेल-मिलाप तथा आशा का जश्न मनाने का अवसर देता है।
अंत में, वेटिकन ने दुनिया भर के हिंदू समुदायों को “हैप्पी दीपावली” (Happy Deepavali) की गर्मजोशी से बधाई दी।

