5 सीटों पर जीत के बाद शिवपाल के नाम की गूंज, पोस्टर से अखिलेश गायब

उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के खेमे में जश्न का माहौल है। 11 में से 5 सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद पार्टी समर्थकों ने इसका सीधा श्रेय राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव को दिया है। सपा समर्थक राममूर्ति यादव ने शिवपाल के समर्थन में पोस्टर लगाए हैं, जिन पर बड़े अक्षरों में लिखा है- ‘चचा हैं तो सपा है।’ इन पोस्टरों के जरिए यह संदेश दिया जा रहा है कि शिवपाल यादव की चुनावी रणनीति से भाजपा का किला ध्वस्त हुआ है। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 6 और सपा ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की है।
पोस्टर के जरिए संगठन में शिवपाल की अहमियत का संदेश
एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद सपा कार्यकर्ता खुलकर शिवपाल यादव के पक्ष में आ गए हैं। पोस्टर में एमएलसी चुनाव में रिकॉर्ड जीत की बधाई देते हुए शिवपाल के राजनीतिक ‘जादू’ का जिक्र किया गया है। पार्टी के पुराने नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच शिवपाल की मजबूत पकड़ मानी जाती है। स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के समय से ही संगठन में उनकी गहरी सक्रियता रही है। समर्थकों ने पोस्टर के जरिए यह बताने का प्रयास किया है कि संगठन की मजबूती के पीछे शिवपाल एक प्रमुख चेहरा हैं और उनकी सक्रियता का फायदा पार्टी को मिला है।
लखनऊ और वाराणसी के नतीजों ने चौंकाया
समाजवादी पार्टी ने लखनऊ स्नातक, आगरा शिक्षक और वाराणसी की दोनों सीटों पर जीत हासिल कर राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। राजधानी लखनऊ की स्नातक निर्वाचन क्षेत्र सीट पर सपा प्रत्याशी कांति सिंह ने भाजपा के मौजूदा एमएलसी अवनीश कुमार सिंह को हराकर बड़ा उलटफेर किया। इस सीट पर पहले भाजपा का कब्जा था और कांति सिंह की जीत को राजधानी में सपा के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।
पीएम के गढ़ में सपा की दोहरी जीत
राजधानी के अलावा वाराणसी में भी सपा ने बड़ी जीत दर्ज की है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा उम्मीदवार लाल बिहारी यादव ने जीत हासिल की। वहीं, स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में आशुतोष सिन्हा ने भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह को चुनाव हरा दिया।
मिशन-2027 की तैयारियों का लिटमस टेस्ट
इन चुनाव परिणामों को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के नजरिए से देखा जा रहा है। शिक्षक और स्नातक वर्ग के मतदाताओं के बीच दोनों प्रमुख दलों की पकड़ का आकलन करने के लिए यह चुनाव बेहद अहम था। पांच सीटों पर जीत हासिल कर सपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह आगामी चुनावों में भाजपा को कई क्षेत्रों में मजबूत चुनौती देने की स्थिति में है।

