RJD से अलग लड़ने का फैसला पड़ा भारी? बिहार में कांग्रेस पांचों सीटें हारी

बिहार की 8 विधान परिषद (MLC) सीटों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी ने जिन 5 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, उन सभी पर उसे करारी हार का सामना करना पड़ा है। सबसे बड़ा नुकसान दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में हुआ, जहां कांग्रेस ने अपनी जीती हुई सीट भी गंवा दी।
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: कांग्रेस प्रत्याशी को सिर्फ 21 वोट
सबसे चौंकाने वाला और निराशाजनक नतीजा पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से आया है। यहां कांग्रेस ने सेवा दल के अध्यक्ष संजय यादव को चुनावी मैदान में उतारा था। इस सीट पर कुल 8,758 वोट पड़े, जिनमें से 8,490 वैध पाए गए। जीतने वाले उम्मीदवार को 4,487 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी संजय यादव महज 21 वोट ही हासिल कर सके। यहां पार्टी को 1% वोट भी नहीं मिला।
वहीं, पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार असादुल्लाह खान भी कोई खास छाप नहीं छोड़ सके। उन्हें केवल 971 वोट मिले और वे चौथे स्थान पर रहे।
दरभंगा शिक्षक: जीती हुई सीट भी हारी कांग्रेस
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस की ओर से निवर्तमान MLC मदन मोहन झा मैदान में थे। वे इकलौते कांग्रेस उम्मीदवार रहे जिन्होंने मुकाबले में कुछ हद तक टक्कर दी। यहां कुल 7,495 मत पड़े (7,753 वैध मतों का आंकड़ा तकनीकी त्रुटि हो सकता है)। जीतने वाले जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. एसपी राय को 4,088 वोट मिले, जबकि मदन मोहन झा को 2,977 वोट प्राप्त हुए।
कोसी और दरभंगा स्नातक में भी निराशाजनक प्रदर्शन
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कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: कांग्रेस ने मनोज जायसवाल को उम्मीदवार बनाया था। 64,401 वैध वोटों में से जीतने वाले प्रत्याशी ने 31,823 वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को सिर्फ 2,297 वोट (महज 3 प्रतिशत) मिले।
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दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: प्रथम वरीयता के मतों की गिनती के बाद कांग्रेस उम्मीदवार रजनीकांत पाठक महज 3,496 वोटों के साथ पांचवें स्थान पर खिसक गए हैं। यहां बीजेपी के सर्वेश कुमार और आरजेडी के अनिल झा के बीच मुख्य मुकाबला है।
हार पर कांग्रेस का तर्क: ‘सिस्टम से लड़ रहे थे’
पांचों सीटों पर मिली करारी हार के बावजूद कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग और सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस मीडिया विभाग के कॉर्डिनेटर असित नाथ तिवारी ने हार को लेकर कहा, “चुनाव में हम एक बहुत बड़े गठबंधन के खिलाफ मैदान में थे, जिसकी केंद्र और राज्य दोनों जगह सरकार है। चुनाव आयोग उनका प्रचारक और लठैत है। हम इतने बड़े गठबंधन के खिलाफ अकेले लड़े, परिणाम हमारे पक्ष में नहीं है, लेकिन हमारी लड़ाई जारी रहेगी।”

