विलय दिवस पर महबूबा का हमला, शेख अब्दुल्ला और BJP दोनों को घेरा

Mehbooba Mufti
शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

जम्मू-कश्मीर के विलय दिवस (26 अक्टूबर) के मौके पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला पर गंभीर आरोप लगाए हैं। श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए मुफ्ती ने कश्मीर में फैले अविश्वास और भारी सैन्यीकरण के लिए सीधे तौर पर अब्दुल्ला के फैसलों को जिम्मेदार ठहराया।

शेख अब्दुल्ला पर अविश्वास और ‘आतंकवादी’ ठप्पे का आरोप

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि 1947 में जम्मू-कश्मीर ने धार्मिक बंटवारे को ठुकराकर महात्मा गांधी के धर्मनिरपेक्ष भारत का साथ चुना था। शेख अब्दुल्ला द्वारा विलय की पुष्टि ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि भारत कोई कब्जा करने वाली ताकत नहीं है।

उन्होंने सवाल उठाया कि 1953 तक ऐसा क्या हुआ कि शेख अब्दुल्ला इसके खिलाफ हो गए और उन्होंने जनमत संग्रह (Plebiscite) का अभियान शुरू कर दिया। मुफ्ती ने दावा किया कि इसी फैसले का खामियाजा कश्मीर आज भी भुगत रहा है। उन्होंने कहा, “आज कश्मीर सबसे ज्यादा सैन्यीकृत इलाका है। यह उसी अविश्वास का नतीजा है और इसी वजह से कश्मीरी लोगों पर ‘आतंकवादी’ होने का ठप्पा लग गया।”

‘अनुच्छेद 370 हटना विलय की शर्तों का उल्लंघन’

केंद्र सरकार के 5 अगस्त 2019 के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाना विलय के समय हुए मूल समझौतों को ‘रद्दी की टोकरी में डालने’ जैसा है। उन्होंने याद दिलाया कि जम्मू-कश्मीर का विलय अपनी विशिष्ट संस्कृति की रक्षा के लिए कुछ शर्तों (अनुच्छेद 370 और 35A) के साथ हुआ था, जो इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन (विलय पत्र) का हिस्सा थे।

उन्होंने चेतावनी दी कि केवल ताकत और 16 लाख सैनिकों की तैनाती से कश्मीर मुद्दे को हल नहीं किया जा सकता।

‘अदालतों से ज्यादा भारत की जनता पर भरोसा’

युवाओं से बंदूक संस्कृति और हिंसा से दूर रहने की अपील करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि क्षेत्र के विशेष दर्जे की बहाली की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीकों से लड़ी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “भले ही सरकार और अदालतों ने हमें निराश किया है, मुझे भारत की आम जनता पर पूरा भरोसा है। भारत के लोगों को अपना वादा निभाना चाहिए।”

‘जबरन थोपी गई शांति को जीत बता रही BJP’

महबूबा ने केंद्र सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि कश्मीर में विरोध प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं है और बीजेपी इस ‘जबरन थोपी गई शांति’ को अपनी जीत के रूप में पेश कर रही है।

अपनी बात को समाप्त करते हुए उन्होंने कहा कि तुर्की और पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा उठा रहे हैं। आगामी यूपी चुनावों में भी कश्मीर एक बड़ा एजेंडा होगा, लेकिन खुद कश्मीर के लोगों को अपने मुद्दे पर बात करने की अनुमति नहीं है।