पूर्व IAS राम बहादुर अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा में हुए शामिल

युवाओं और दलित समाज की नाराजगी का आकलन करते हुए रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राम बहादुर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) से नाता तोड़ लिया है। उन्होंने समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और शिवपाल यादव की मौजूदगी में सपा का दामन थाम लिया है।
दलित (पासी) समुदाय से आने वाले राम बहादुर को बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती का बेहद करीबी अफसर माना जाता था। वह गोंडा के जिलाधिकारी और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद 2017 में उन्होंने बसपा के टिकट पर लखनऊ की मोहनलालगंज सीट से चुनाव भी लड़ा था, जिसमें उन्हें मामूली अंतर से हार मिली थी।
सपा को मिलेगा पीडीए (PDA) में फायदा
राम बहादुर डॉ. आंबेडकर राष्ट्रीय एकता मंच से भी जुड़े रहे हैं। उनकी दलित और पासी समुदाय में मजबूत पकड़ मानी जाती है। ऐसे रसूखदार दलित चेहरे के पार्टी में आने से अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और ताकत मिलेगी, जिसका सीधा फायदा आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है।

