ओव्दा एयरबेस पर हेगसेथ-नेतन्याहू की मुलाकात, फिर भड़केगी ईरान जंग?

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इजराइल का अघोषित दौरा किया है। सोमवार को दक्षिणी इजराइल के ओवदा एयरबेस (Ovda Air Base) पर उनकी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक लंबी बैठक हुई। आठ महीने से चल रहे मध्य पूर्व युद्ध के बीच हुई इस गुप्त मुलाकात ने वाशिंगटन के अगले कदम और ईरान के खिलाफ नए सैन्य ऑपरेशन की अटकलों को तेज कर दिया है।
एयरबेस पर सीक्रेट मीटिंग के रणनीतिक मायने
एक्सियोस (Axios) की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं की यह बैठक उस ओवदा एयरबेस पर हुई जहां अमेरिकी फाइटर जेट्स और एरियल रिफ्यूलिंग (हवा में ईंधन भरने वाले) विमान तैनात हैं। लंबी दूरी के सैन्य अभियानों में एरियल रिफ्यूलिंग विमानों की भूमिका बेहद अहम होती है।
इजराइली मीडिया आउटलेट वाईनेट (Ynet) के अनुसार, नेतन्याहू इस बैठक के लिए सामान्य तौर पर इस्तेमाल होने वाले हेलीकॉप्टर के बजाय बेन गुरियन एयरपोर्ट से एक निजी विमान के जरिए एयरबेस पहुंचे। रॉयटर्स ने तीन इजराइली अधिकारियों के हवाले से बताया कि इस असाधारण रूप से लंबी बैठक में मुख्य रूप से ईरान को लेकर चर्चा हुई।
पेंटागन ने नेतन्याहू के साथ हेगसेथ की मुलाकात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। खुद हेगसेथ ने एक्स (X) पर पोस्ट कर क्षेत्र में एक “ऐतिहासिक मिशन” पर मौजूद अमेरिकी सैनिकों से मिलने की बात स्वीकारी, लेकिन इजराइल या प्रधानमंत्री का कोई जिक्र नहीं किया।
नेतन्याहू का ट्रंप को संदेश- ‘हमें अपना काम खत्म करना है’
इस दौरे की टाइमिंग ने राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ा दी हैं। यह बैठक इजराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से ठीक आठ दिन पहले और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नेतन्याहू का सार्वजनिक समर्थन करने के एक दिन बाद हुई है।
सोमवार को जारी एक फोन कॉल के वीडियो में नेतन्याहू ने ट्रंप को समर्थन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा, “डोनाल्ड, हमें एक काम खत्म करना है। आपने यह कहा था, और हम इसे मिलकर खत्म करेंगे।” इससे पहले सोमवार को ही नेतन्याहू ने उत्तरी इजराइल के रमत डेविड एयरबेस का दौरा कर वायुसेना की युद्धक तैयारियों और दुश्मनों पर प्रहार करने की क्षमता को रेखांकित किया था।
ईरान पर नए हमले की कितनी आशंका?
ईरान के परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंधों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी विवाद के बीच कूटनीतिक प्रयास फिलहाल ठंडे पड़े हैं। अमेरिका और इजराइल ने इसी साल फरवरी में ईरान के खिलाफ संयुक्त हमले किए थे, जिससे यह क्षेत्रीय संघर्ष व्यापक हो गया था।
एक्सियोस की रिपोर्ट बताती है कि वाशिंगटन और इजराइल नए सिरे से बड़े कॉम्बैट ऑपरेशन शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। नेतन्याहू पहले ही संकेत दे चुके हैं कि 27 अक्टूबर के चुनाव से पहले वह कोई बड़ा हमला नहीं करेंगे। वहीं, ट्रंप ने भी कहा है कि वह 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेंगे। सोमवार को ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है और अब अमेरिका इस युद्ध से बाहर निकलने की स्थिति में है।
खाड़ी देशों की बढ़ी चिंता और कूटनीतिक हलचल
अमेरिका और इजराइल के किसी भी नए सैन्य अभियान का सीधा असर खाड़ी देशों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले व्यापार पर पड़ेगा। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब पर अपने हमले तेज कर रहे हैं, जिसने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है।
सैन्य तैयारियों के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी बातचीत जारी है। पाकिस्तान जहां मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है, वहीं रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सोमवार को तेहरान में ईरानी नेताओं के साथ वार्ता की।

