नई नवेली: डायन-चुड़ैल की कहानी में रावण की एंट्री से भटकी यामी की हॉरर-कॉमेडी

निर्देशक: बालाजी मोहन कलाकार: यामी गौतम, आदिनाथ एम. कोठारे, अनुराग ठाकुर, सुनीता राजवर, मीता वशिष्ठ, सुष्मिता मुखर्जी श्रेणी: हॉरर, कॉमेडी अवधि: 2 घंटे 18 मिनट क्रिटिक रेटिंग: 2.5/5
नई नवेली मूवी रिव्यू:
पिछले कुछ वर्षों में बॉलीवुड ने ‘स्त्री’, ‘मुंज्या’ और ‘द वन’ जैसी फिल्मों के जरिए लोककथाओं को आज के दौर से जोड़कर ‘हॉरर-कॉमेडी’ (Horror-Comedy) का एक बेहद सफल फॉर्मूला ईजाद किया है। निर्देशक बालाजी मोहन की नई फिल्म ‘नई नवेली’ (Nayi Naveli) इसी फॉर्मूले को रामायण और रावण के पौराणिक संदर्भों के साथ एक नया विस्तार देने की कोशिश करती है।
फिल्म का मूल विचार दिलचस्प है, लेकिन डायन-चुड़ैल की आम दुनिया से शुरू होकर रामायण जैसे विराट पौराणिक आख्यान से मेल बैठाने के चक्कर में यह फिल्म अपनी पटरी से पूरी तरह उतर जाती है।
‘नई नवेली’ की कहानी: मेरठ का अजीबोगरीब परिवार और डायन का शक
कहानी मेरठ के अवस्थी परिवार की है। इस अजीबोगरीब परिवार में नई बहू मोहिनी (यामी गौतम) की एंट्री होती है। मोहिनी बेहद खूबसूरत और समझदार है। वह अपनी सूझबूझ से परिवार की सभी उलझनें सुलझा देती है, जिससे हर कोई उसे अपना सौभाग्य मानने लगता है। उसका पति राजा अवस्थी (आदिनाथ कोठारे) भी उस पर जान छिड़कता है।
कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब राजा का भाई बंटू (अनुराग ठाकुर) मोहिनी के कुछ असामान्य व्यवहार और घर में होने वाली अजीब घटनाओं को देखकर उस पर शक करने लगता है। बंटू को लगता है कि उसकी नई भाभी कोई साधारण स्त्री नहीं, बल्कि एक ‘डायन’ है। अब बंटू मोहिनी की असलियत जानने के लिए जासूस बन जाता है। क्या मोहिनी सच में डायन है या यह सिर्फ बंटू का वहम है? यही फिल्म का मुख्य रहस्य है।
इंटरवल के बाद भटक जाती है फिल्म
फिल्म का पहला हाफ बेहतरीन है। एक रहस्यमयी बहू का घर में आना और बंटू के साथ उसकी नोकझोंक अच्छी कॉमेडी पैदा करती है। मीता वशिष्ठ (बुआ) और सुष्मिता मुखर्जी (दादी) के रूप में खूब हंसाती हैं।
लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म बुरी तरह निराश करती है। मेरठ के एक परिवार की यह हल्की-फुल्की हॉरर-कॉमेडी अचानक राम-रावण के युद्ध में तब्दील हो जाती है। फिल्म में राक्षसों की जगह जॉम्बीज (Zombies) का डांस दिखाया गया है और शिव के त्रिशूल व हनुमान की गदा के बेअसर होने जैसे प्रसंग बेहद अटपटे लगते हैं। कमजोर पटकथा के कारण रावण का राक्षसी रूप भी प्रभावशाली होने के बजाय ओवर-ड्रैमेटिक लगता है। नतीजतन, क्लाइमेक्स पूरी तरह फेल हो जाता है।
अभिनय: यामी गौतम ने मोह लिया मन, अनुराग ठाकुर ने लूटी महफिल
-
यामी गौतम (Yami Gautam): मोहिनी के रूप में यामी गौतम ने बेहतरीन काम किया है। एक मासूम आदर्श बहू और रहस्यमयी स्त्री के बीच वह सहजता से रंग बदलती हैं।
-
अनुराग ठाकुर: फिल्म की असली जान अनुराग ठाकुर (बंटू) हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग और मजेदार हाव-भाव दर्शकों को बांधे रखते हैं।
-
आदिनाथ कोठारे: राजा के रूप में आदिनाथ ने भावनात्मक दृश्यों में अच्छा काम किया है, लेकिन राक्षसी अवतार में उनकी चीख-पुकार कुछ ज्यादा ही लाउड लगती है।
-
अन्य कलाकारों (सुनीता राजवर, मीता वशिष्ठ) ने अपनी छोटी भूमिकाओं में भी असर छोड़ा है।
संगीत और निर्देशन
फिल्म का संगीत पक्ष मजबूत है। ‘फटा पटाखा’ और ‘भाभी तबाही’ जैसे गाने अच्छे लगते हैं। लेकिन निर्देशक बालाजी मोहन (Balaji Mohan) कहानी के दो अलग-अलग हिस्सों (कॉमेडी और पौराणिक युद्ध) के बीच संतुलन बनाने में नाकाम रहे।
क्यों देखें?
अगर आप यामी गौतम की बेहतरीन एक्टिंग, हॉरर-कॉमेडी और पौराणिक कहानियों के घालमेल के शौकीन हैं, तो इसे एक बार देख सकते हैं। हालांकि, फिल्म से ज्यादा लॉजिक या मनोरंजन की उम्मीद न रखें।

